
Semicon 2.0 में ₹1 लाख करोड़ के निवेश का वादा, IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा निवेश आने की तैयारी है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, Semicon 2.0 के तहत अब तक करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश का कमिटमेंट मिल चुका है। सरकार को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से कम से कम 1 लाख नौकरियां भी पैदा हो सकती हैं।
In Short
- Semicon 2.0 के तहत भारत को अब तक करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश का कमिटमेंट मिला है।
- IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, Semicon 2.0 से कम से कम 1 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
- करीब 400 यूनिवर्सिटी और संस्थानों में चिप डिजाइन की पढ़ाई पहले से हो रही है।
भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी हो रही है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि Semicon 2.0 शुरू होने के बाद भारत को अब तक 11 से 12 अरब डॉलर यानी करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश का कमिटमेंट मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से कम से कम 1 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने इसे भी एक कम अनुमान बताया है।
दो से तीन साल में आएगा निवेश
अश्विनी वैष्णव ने SEMICON India 2026 के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ये निवेश कमिटमेंट अगले दो से तीन साल के लिए हैं। निवेश सेमीकंडक्टर सेक्टर के कई हिस्सों में होगा। इसमें इक्विपमेंट, मटेरियल, गैस, केमिकल्स, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग यानी ATMP, सब्सट्रेट और वेफर्स शामिल हैं।
मंत्री ने निवेश करने वाली कंपनियों के नाम नहीं बताए। उनके मुताबिक, कई कंपनियां अपने बोर्ड और शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मिलने के बाद ही अपनी योजनाओं की घोषणा करना चाहती हैं।
Semicon 2.0 का क्या है लक्ष्य?
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, Semicon 1.0 का फोकस भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की बुनियाद तैयार करने पर था। अब Semicon 2.0 के जरिए एक पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की तैयारी है।

इसमें चिप डिजाइन, इक्विपमेंट और मटेरियल, फैब्स, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। दूसरे चरण में सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियों को भी मदद दी जाएगी। इसमें स्टार्टअप्स के साथ बड़ी कंपनियां भी शामिल होंगी।
20 डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिली फंडिंग
वैष्णव ने बताया कि Semicon के पहले चरण के तहत 20 डीप-टेक सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स ने वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की है। उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया।
सरकार इक्विपमेंट, मटेरियल, केमिकल और गैस बनाने वाली कंपनियों को भी भारत में आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वैष्णव ने जापान के इकोसिस्टम का उदाहरण देते हुए बताया कि इस तरह की इंडस्ट्री हाई-एंड चिप मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट कर सकती है।
400 संस्थानों में पढ़ाया जा रहा चिप डिजाइन
Semicon के पहले चरण के तहत करीब 400 यूनिवर्सिटी और संस्थानों में चिप डिजाइन की पढ़ाई पहले से हो रही है। Semicon 2.0 में इसे सिस्टम डिजाइन तक बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
सरकार आने वाली सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों के लिए टेक्नीशियन तैयार करने की भी योजना बना रही है। इसके लिए इंडस्ट्री और ताइवान के ITRI जैसे संस्थानों के साथ मिलकर ट्रेनिंग दी जाएगी।
अश्विनी वैष्णव ने ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक जोखिम और कुछ जगहों पर सीमित सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट कहां लगाएंगी, इसका फैसला पॉलिसी की स्थिरता, सरकारी मदद और स्थानीय इकोसिस्टम की मजबूती जैसे पहलुओं के आधार पर करेंगी।

