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टाटा संस की लिस्टिंग पर क्यों मचा बवाल? नोएल टाटा की चिंता से बढ़ी ग्रुप के अंदर हलचल

टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर ग्रुप के भीतर चर्चा तेज है। नोएल टाटा ने इसके असर को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिससे लिस्टिंग से बचने का रास्ता निकल सकता है। अब नजर RBI और बोर्ड पर है।

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In Short

  • नोएल टाटा ने टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर चिंता जताई।
  • टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस का दो अनलिस्टेड यूनिट्स के साथ मर्जर करने का प्रस्ताव रखा।
  • प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए टाटा संस बोर्ड और RBI की मंजूरी जरूरी होगी।

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर ग्रुप के अंदर चर्चा तेज हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा ने लिस्टिंग को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि अगर टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट होती है तो मुश्किल दौर से गुजरने वाली ग्रुप की कंपनियों की मदद करने के उसके मौजूदा तरीके पर असर पड़ सकता है।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा ने रिपब्लिक टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जब भी टाटा ग्रुप की कोई कंपनी मुश्किल में रही है, टाटा संस उसके लिए सहारा बनी है। इसी वजह से बैंक, कर्ज देने वाली एजेंसियां, शेयरहोल्डर्स और सप्लायर्स को भी भरोसा मिलता रहा है।

लिस्टिंग को लेकर क्या है नोएल टाटा की चिंता?

नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा संस के लिस्ट होने के बाद इसमें व्यक्तिगत शेयरहोल्डर्स भी होंगे। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वे किसी मुश्किल दौर से गुजर रही ग्रुप कंपनी में निवेश करने के फैसले से सहमत होंगे और इसके लिए कंपनी को अनुमति देंगे।

उनका कहना है कि इससे उस बुनियादी तरीके में बदलाव आ सकता है, जिसके आधार पर टाटा ग्रुप पिछले 150 वर्षों से काम करता आया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

17 सितंबर की बैठक में क्या हुआ?

17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड की बैठक में लिस्टिंग को आगे बढ़ाने और नटराजन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला हुआ। इस बैठक में नोएल टाटा की राय के मुकाबले बोर्ड में दूसरी तरफ ज्यादा वोट पड़े।

इसके बाद टाटा ग्रुप के भीतर नियंत्रण को लेकर खींचतान सामने आई। टाटा ग्रुप का कारोबार प्रोसेस्ड नमक से लेकर एसयूवी तक फैला हुआ है।

टाटा ट्रस्ट्स ने दिया नया प्रस्ताव

सोमवार को टाटा ट्रस्ट्स ने एक प्रस्ताव रखा कि टाटा संस का उसकी दो अनलिस्टेड यूनिट्स के साथ मर्जर किया जाए। इससे टाटा संस को उस रेगुलेटरी कैटेगरी से बाहर निकालने की संभावना बन सकती है, जिसके तहत उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है।

नोएल टाटा के मुताबिक, इस प्रस्ताव से टाटा संस में फिर से ऐसी संरचना बन सकती है, जिसमें ऑपरेटिंग और फाइनेंशियल दोनों तरह के बिजनेस एक ही कंपनी में हों। उन्होंने कहा कि भारत में दूसरी होल्डिंग कंपनियों में भी इस तरह की व्यवस्था आम है।

RBI की मंजूरी भी जरूरी

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए टाटा संस के बोर्ड और भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की मंजूरी जरूरी होगी।

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नोएल टाटा ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स चाहता है कि टाटा संस इस प्रस्ताव की समीक्षा करे और जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव करे। इसके साथ ही RBI से भी बातचीत की जाए। उनका मानना है कि यह ऐसा रास्ता हो सकता है, जिससे टाटा संस की लिस्टिंग से बचा जा सके।

नोएल टाटा ने यह भी कहा कि लिस्टिंग से टाटा संस के परोपकारी उद्देश्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि RBI इस मुद्दे पर बातचीत करेगा और दोनों पक्ष किसी साझा रास्ते तक पहुंच सकेंगे।