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ट्रंप के साथ गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने साइन किया Super Intelligence Accord, जानें अब क्या बदलेगा

AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसकी सुरक्षा को लेकर व्हाइट हाउस में अहम पहल हुई है। सुंदर पिचाई समेत टेक लीडर्स ने सुपर इंटेलिजेंस से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें AI मॉडल्स की टेस्टिंग, निगरानी और जिम्मेदार विकास को लेकर कई अहम कदम शामिल हैं।

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In Short

  • व्हाइट हाउस में सुपर इंटेलिजेंस को लेकर अहम समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
  • सुंदर पिचाई ने AI की टेस्टिंग, इवैल्यूएशन और रेड-टीमिंग पर जोर दिया।
  • AI कंपनियों के लिए इंटरनल कंट्रोल, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर पर निगरानी की बात कही गई।

अमेरिका में सुपर इंटेलिजेंस और फ्रंटियर AI मॉडल्स के सुरक्षित विकास को लेकर टेक कंपनियों और प्रशासन के बीच एक अहम पहल हुई है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्पीकर माइक जॉनसन, प्रशासन के अधिकारियों और टेक लीडर्स के साथ बैठक की। इस दौरान White House Accord on Super Intelligence और Joint Commitment on Frontier Responsibilities पर हस्ताक्षर किए गए।

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 सुंदर पिचाई ने क्या कहा?

सुंदर पिचाई ने बताया कि बैठक में टेक्नोलॉजी और उसके भविष्य को लेकर अहम बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि गूगल ने पिछले दो साल में सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश किया है और आगे भी निवेश जारी रहेगा।

कंपनी का मकसद ऐसी टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स तैयार करना है, जो लोगों और कारोबारों के लिए उपयोगी हों। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों में निवेश करने और टेक्नोलॉजी को लेकर भरोसा बढ़ाने पर भी कंपनी का फोकस है।

AI के लिए टेस्टिंग और सुरक्षा पर जोर

पिचाई के मुताबिक, टेक इंडस्ट्री को इनोवेशन के साथ जिम्मेदारी भी निभानी होगी। गूगल AI मॉडल या प्रोडक्ट जारी करने से पहले टेस्टिंग, इवैल्यूएशन, रेड-टीमिंग और दूसरे सुरक्षा उपायों पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल और उसके तय उद्देश्य से अलग व्यवहार करने जैसे जोखिमों को कम करना है।

समझौते में भी कंपनियों के लिए कई स्तर पर कंट्रोल और ऑडिट की बात कही गई है। कंपनियों को ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट के दौरान अपने मॉडल्स की क्षमताओं और अलाइनमेंट पर नजर रखने के लिए मजबूत इंटरनल कंट्रोल रखने होंगे। इसमें साइबर सिक्योरिटी, बायोसिक्योरिटी और केमिकल खतरों जैसे क्षेत्रों का भी जिक्र किया गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

कंपनियों के लिए चार स्तर पर निगरानी

दस्तावेज के मुताबिक, कंपनियों को इंटरनल टीम के जरिए यह सुनिश्चित करना होगा कि कंट्रोल, मॉनिटरिंग और डिटेक्शन सिस्टम सही तरीके से काम करें और किसी समस्या का पता चलने पर उसे दूर किया जाए।

इसके अलावा स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर या इवैल्यूएटर से इन व्यवस्थाओं की जांच कराने की बात कही गई है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक स्वतंत्र कमेटी भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी और इंटरनल तथा एक्सटर्नल ऑडिट से जुड़ी रिपोर्ट हासिल करेगी।

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आगे कानून या नियमों का रूप भी ले सकते हैं कदम

समझौते में कहा गया है कि इसमें शामिल कंपनियां नियमित रूप से मिलकर सुरक्षा के लिए स्टैंडर्ड और बेहतर तरीके तय करेंगी। समय के साथ इन कदमों को कानून या रेगुलेशन का रूप देना भी उचित हो सकता है।

सुंदर पिचाई ने कहा कि गूगल दूसरे इंडस्ट्री लीडर्स के साथ मिलकर नियम और मानक बनाने तथा लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, यह समझौता सुरक्षित टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए ठोस कदम तय करता है, साथ ही इसके आर्थिक और वैज्ञानिक फायदों को आगे बढ़ाने पर भी जोर देता है।