एलन मस्क के आरोपों पर सुनील मित्तल का पलटवार, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट पर बढ़ी तकरार
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर एलन मस्क और सुनील भारती मित्तल के बीच विवाद बढ़ता दिख रहा है। मस्क के आरोपों पर मित्तल ने जवाब देते हुए कहा कि उनकी कंपनी वनवेब मंजूरी की कतार में स्टारलिंक से काफी आगे है। आखिर दोनों कंपनियों के बीच क्या है पूरा विवाद?

In Short
- सुनील भारती मित्तल ने कहा कि मंजूरी की कतार में वनवेब, स्टारलिंक से काफी आगे है।
- एलन मस्क ने भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम तक समान पहुंच रोकने का आरोप लगाया।
- सुनील भारती ने AI के लिए जल्द वैश्विक नियम बनाने और सप्लाई चेन पर निर्भरता घटाने की जरूरत बताई।
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर एलन मस्क की स्टारलिंक (Starlink) और सुनील भारती मित्तल की वनवेब (OneWeb) के बीच मुकाबला तेज हो गया है। इस बीच भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि उनकी कंपनी भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन की मंजूरी पाने की कतार में स्टारलिंक से काफी आगे है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब एलन मस्क ने भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम तक पहुंच को लेकर बड़े कारोबारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में सुनील भारती मित्तल ने कहा कि उनकी कंपनी ने पांच साल पहले ही मंजूरी के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक जरूरी अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी कंपनी को एलन मस्क की स्टारलिंक से कुछ दिन पहले भी मंजूरी मिलती है, तो उन्हें खुशी होगी।
एलन मस्क के आरोपों पर मित्तल का जवाब
दरअसल, एलन मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया था कि कुछ बड़े कारोबारी भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम तक समान पहुंच मिलने में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कारोबारी देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं।
मस्क की इस टिप्पणी को सुनील भारती मित्तल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से जोड़कर देखा गया। मस्क ने अंबानी को भारत का 'असली बॉस' तक कहा था।
पांच साल से मंजूरी का इंतजार
सुनील भारती मित्तल ने बताया कि वनवेब का ग्राउंड नेटवर्क पिछले तीन साल से तैयार है, जबकि उसके सैटेलाइट पिछले पांच साल से भारत के ऊपर मौजूद हैं।
वनवेब पेरिस स्थित यूटेलसैट ग्रुप (Eutelsat Group) का हिस्सा है और इसे स्टारलिंक का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।
वहीं, मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने 2022 में लक्जमबर्ग की SES SA के साथ संयुक्त उद्यम बनाया था। इसका मकसद मीडियम अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिए किफायती हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराना है।
इस बीच भारत के संचार मंत्रालय ने कहा है कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए नियामकीय व्यवस्था निष्पक्ष है और किसी के साथ भेदभाव नहीं करती।
AI को लेकर भी दी बड़ी चेतावनी
सुनील भारती मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए जल्द अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सरकारों को किसी गंभीर AI दुर्घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए।
उन्होंने विमानन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह दुनियाभर में उड़ानों और एयरलाइंस के लिए साझा नियम हैं, उसी तरह AI के लिए भी वैश्विक व्यवस्था होनी चाहिए।
सुनील भारती मित्तल ने कहा कि अमेरिकी और चीनी AI सिस्टम अलग-अलग रहकर काम नहीं कर सकते। इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त बातचीत नहीं हो रही है।
सप्लाई चेन पर भी जताई चिंता
सुनील भारती मित्तल ने कहा कि दुनिया को किसी एक देश की सप्लाई चेन पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। देशों के बीच सहयोग जरूरी है, लेकिन अत्यधिक निर्भरता से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा उन्होंने अपने टेलीकॉम कारोबार को दुनिया के दूसरे बाजारों में विस्तार देने की योजना भी साझा की।
