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Small Finance Banks: बैंकों की कमाई में आएगा उछाल, FY2027 में बढ़ेगा मुनाफा

स्मॉल फाइनेंस बैंकों की कमाई में जल्द अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक लोन की किस्तें समय पर मिलने और डिफॉल्ट घटने से बैंकों का मुनाफा बढ़ सकता है। आखिर कितनी बढ़ेगी कमाई और कौन-सी चुनौतियां बनी रहेंगी? जानिए पूरी खबर।

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In Short

  • वित्त वर्ष 2027 में SFBs का RoA 1.5% तक पहुंचने का अनुमान।
  • माइक्रोफाइनेंस संकट घटने से क्रेडिट कॉस्ट में कमी की उम्मीद।

देश के स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) की कमाई में वित्त वर्ष 2027 में सुधार होने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स (Crisil Ratings) के मुताबिक माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में कर्ज चुकाने से जुड़ी परेशानियां कम होने से बैंकों की क्रेडिट कॉस्ट घटेगी। इससे उनकी कमाई और लोन पर मिलने वाले ब्याज से होने वाली आय को सहारा मिलेगा। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में इन बैंकों का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) बढ़कर 1.3 से 1.5 फीसदी तक पहुंच सकता है। पिछले दो वित्त वर्षों में यह 0.6 फीसदी से नीचे रहा था।

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माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में सुधार से मिलेगी राहत

पिछले दो वित्त वर्षों में स्मॉल फाइनेंस बैंकों की कमाई पर दबाव रहा है। माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में कर्ज की किस्तें समय पर नहीं चुकाने के मामले बढ़ने से बैंकों को ज्यादा रकम का प्रावधान करना पड़ा। इसके अलावा ब्याज से होने वाली आय में भी कमी आई। इन वजहों से बैंकों की कमाई प्रभावित हुई।

क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक अब कर्ज की वसूली बेहतर होने और नए डिफॉल्ट के मामले कम होने की उम्मीद है। नए नियमों के तहत दिए गए माइक्रोफाइनेंस लोन का प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। इससे बैंकों को खराब कर्ज के लिए कम रकम अलग रखनी पड़ेगी।

क्रिसिल रेटिंग्स की डायरेक्टर अपर्णा किरुबाकरन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में क्रेडिट कॉस्ट घटकर करीब 1.5 फीसदी रह सकती है। पिछले दो वित्त वर्षों में यह 2.3 से 2.5 फीसदी के बीच थी।

NIM में सुधार से बढ़ेगी कमाई

स्मॉल फाइनेंस बैंकों की कमाई में सुधार की एक और वजह नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में बढ़ोतरी होगी। यह बैंकों की ब्याज से होने वाली कमाई और ब्याज के रूप में चुकाई जाने वाली रकम के बीच का अंतर बताता है।

वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच इन बैंकों का NIM करीब 200 बेसिस पॉइंट घटा था। इसकी मुख्य वजह माइक्रोफाइनेंस लोन में डिफॉल्ट बढ़ने के कारण ब्याज से होने वाली आय में कमी थी।

अब वित्त वर्ष 2027 में NIM के बढ़कर 7.1 से 7.3 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026 में यह करीब 6.2 फीसदी था। क्रिसिल रेटिंग्स की एसोसिएट डायरेक्टर वाणी ओजस्वी के मुताबिक, माइक्रोफाइनेंस लोन में डिफॉल्ट कम होने, ब्याज आय में कम कटौती और कर्ज वितरण में बढ़ोतरी से मार्जिन को फायदा मिल सकता है।

जमा पर प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी चुनौती

बेहतर संभावनाओं के बावजूद स्मॉल फाइनेंस बैंकों के सामने कुछ चुनौतियां बनी रहेंगी। इनमें जमा जुटाने के लिए प्रतिस्पर्धा और कम रिटर्न देने वाली सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ना शामिल है।

इन बैंकों की कुल जमा में 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रिटेल डिपॉजिट की है। लेकिन ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए लगातार ज्यादा ब्याज दर देना मुश्किल हो सकता है। हाल में FCNR(B) जमा जुटाने के दौरान स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने यूनिवर्सल बैंकों की तुलना में 50 से 100 बेसिस पॉइंट ज्यादा ब्याज दिया। इसके बावजूद इस माध्यम से जुटाई गई कुल जमा में उनकी हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम रही।

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मौसम से जुड़ा जोखिम भी अहम

क्रिसिल रेटिंग्स ने अल नीनो और सूखे जैसी मौसमी परिस्थितियों को लेकर भी जोखिम जताया है। ऐसी परिस्थितियों से माइक्रोफाइनेंस कर्ज लेने वाले ग्राहकों की कमाई प्रभावित हो सकती है, जिससे उनके लिए किस्त चुकाना मुश्किल हो सकता है।

आने वाले समय में स्मॉल फाइनेंस बैंकों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे फंड जुटाने की लागत, कर्ज की गुणवत्ता और अलग-अलग क्षेत्रों में लोन देने के बीच कितना बेहतर संतुलन बना पाते हैं।