
भारत की GDP ने चौंकाया! 7.8% की शानदार ग्रोथ, लेकिन संजीव सान्याल ने क्यों दी बड़ी चेतावनी?
भारत की 7.8% GDP ग्रोथ ने उम्मीद से बेहतर संकेत दिए हैं। संजीव सान्याल का कहना है कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे कई सेक्टर्स का योगदान है। हालांकि आगे यही रफ्तार कायम रहेगी या नहीं, इसे लेकर कुछ बड़ी चुनौतियां सामने हैं, जिनका असर आने वाली तिमाहियों में दिख सकता है।

In Short
- भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिसे संजीव सान्याल ने उम्मीद से बेहतर और ब्रॉड बेस्ड बताया
- मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन और निवेश ने ग्रोथ को मजबूत सहारा दिया
- तेल की कीमतें, अल नीनो और ग्लोबल अनिश्चितता आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ पर दबाव बढ़ा सकती हैं
भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8% की GDP ग्रोथ के साथ उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल के मुताबिक यह तेजी किसी एक सेक्टर के दम पर नहीं आई है बल्कि अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों ने इसमें योगदान दिया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि आने वाली तिमाहियों में इसी रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज से मिला सहारा
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में संजीव सान्याल ने कहा कि 7.8% की ग्रोथ उनकी उम्मीद से भी ज्यादा रही है। मैन्युफैक्चरिंग फाइनेंशियल सर्विसेज और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर्स ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है।
उन्होंने कहा कि निवेश की भूमिका भी अहम रही है। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तरफ से निवेश मजबूत बना हुआ है जबकि निजी कंपनियां भी ठीक रफ्तार से निवेश कर रही हैं। सान्याल ने मौजूदा ग्रोथ को काफी ब्रॉड बेस्ड बताया।
हालांकि उन्होंने कहा कि मौजूदा ग्लोबल माहौल को देखते हुए हर तिमाही में इतनी ही तेज ग्रोथ की उम्मीद करना मुश्किल है। उनके मुताबिक अगर भारत करीब 7% की ग्रोथ हासिल करता है तो यह भी अच्छा प्रदर्शन होगा।
ग्लोबल अनिश्चितता से बढ़ सकता है दबाव
सान्याल ने ईरान में युद्ध ग्लोबल ट्रेड में रुकावट और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता को प्रमुख जोखिम बताया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट भारत के लिए एक अहम एक्सपोर्ट मार्केट है। इसके अलावा वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और भारत में पैसा भेजते हैं।
ऐसे में इस क्षेत्र में किसी तरह की बड़ी परेशानी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

अल नीनो और तेल की कीमतों पर नजर
सान्याल के मुताबिक अल नीनो का कृषि पर कुछ असर पड़ सकता है हालांकि उन्हें यूरोप के कुछ हिस्सों में देखे गए गंभीर सूखे जैसी स्थिति की उम्मीद नहीं है। मॉनसून अभी जारी है इसलिए इसके पूरे असर का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
तेल की कीमतों को भी उन्होंने एक चुनौती बताया। सान्याल के मुताबिक भारत ने रूस अमेरिका और वेनेजुएला समेत अलग-अलग देशों से ऊर्जा सप्लाई लेकर जोखिम कम करने की कोशिश की है।
घरेलू दबाव की चिंताओं को किया खारिज
बेरोजगारी महंगाई और असमानता को लेकर उठ रहे सवालों पर सान्याल ने कहा कि सरकारी आंकड़े व्यापक घरेलू आर्थिक संकट की तस्वीर नहीं दिखाते। उनके मुताबिक ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी धीरे-धीरे कम हुई है हालांकि पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है।
महंगाई पर उन्होंने कहा कि मौजूदा 4 से 5% का स्तर करीब एक दशक पहले के 8 से 12% के मुकाबले काफी कम है। उन्होंने रिकॉर्ड कार बिक्री और एयर कंडीशनर जैसी चीजों की मजबूत मांग को भी उपभोक्ता खर्च का संकेत बताया।
GDP के तरीके का किया बचाव
सान्याल ने GDP की गणना के तरीके और बेस ईयर में बदलाव का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान अर्थव्यवस्था सामान्य स्थिति में नहीं थी इसलिए बेस ईयर को पहले बदलना संभव नहीं था। उनके मुताबिक 2024 में सामान्य आर्थिक स्थिति मिलने के बाद इसे अपडेट किया गया।
सान्याल का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ कुछ धीमी हो सकती है लेकिन पूरे साल भारत की GDP ग्रोथ फिर भी अच्छी रहने की उम्मीद है।

