डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96 के पार, आखिर किस वजह से टूटा रिकॉर्ड?
भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर के पार पहुंच गया है। महंगा कच्चा तेल, मजबूत डॉलर और अमेरिका-ईरान तनाव ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि विदेशी निवेश बढ़ने से कुछ राहत मिली है, लेकिन आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और महंगाई बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

In Short
- डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96 के पार पहुंचा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी बड़ी वजह।
- अमेरिका-ईरान तनाव और मजबूत डॉलर से रुपये पर दबाव बढ़ा, विदेशी निवेश भी नहीं दे पाया बड़ी राहत।
- रुपये की कमजोरी का असर महंगाई, शेयर बाजार और आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।
Rupee Exchange Rate: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को पहली बार 96 रुपये के पार चला गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, डॉलर की बढ़ती मांग और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ गया।
मंगलवार दोपहर 3:30 बजे ट्रेडिंग के दौरान रुपया गिरकर 96.24 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। बाद में यह 57 पैसे की गिरावट के साथ 96.20 रुपये प्रति डॉलर पर चल रहा था। Business Today के मुताबिक, Bloomberg के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 11% तक गिर चुका है।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
रुपये में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। तेल खरीदने के लिए भुगतान डॉलर में किया जाता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये की कीमत नीचे आने लगती है।
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अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। यही वजह है कि बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है।
विदेशी पैसा आया फिर भी राहत नहीं
DBS Bank की सीनियर इकोनॉमिस्ट राधिका राव के मुताबिक, भारत में विदेशी पैसा आने की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। NRI खातों में जमा बढ़ी है, कंपनियां विदेशों से ज्यादा कर्ज ले रही हैं और विदेशी निवेशक शेयर बाजार में फिर से खरीदारी कर रहे हैं।
आमतौर पर विदेशी पैसा आने से रुपये को सहारा मिलता है, क्योंकि इससे डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है। इसके बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये को संभलने का मौका नहीं दिया। तेल के दाम में तेजी ने फिलहाल विदेशी निवेश से मिलने वाली राहत का असर कम कर दिया है।
कच्चा तेल और मजबूत डॉलर बने बड़ी वजह
LKP Securities के जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, रुपया करीब 0.55% गिरकर 96.20 पर पहुंच गया। Brent Crude की कीमत करीब 4% बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जबकि Dollar Index भी 101 के ऊपर बना रहा।
Dollar Index के मजबूत रहने का मतलब है कि दूसरी करेंसी के मुकाबले डॉलर मजबूत बना हुआ है। एक तरफ तेल खरीदने के लिए डॉलर की मांग बढ़ी और दूसरी तरफ डॉलर पहले से मजबूत रहा। इन दोनों वजहों से रुपये पर ज्यादा दबाव देखने को मिला।
आगे कैसी रह सकती है रुपये की चाल
अब बाजार की नजर अमेरिका के CPI महंगाई आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से पता चलेगा कि अमेरिकी Federal Reserve आगे ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला ले सकता है। इसका असर डॉलर की कीमत पर पड़ेगा और उसी हिसाब से रुपये की अगली चाल भी तय हो सकती है।
जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, फिलहाल रुपया 95.75 से 96.50 रुपये प्रति डॉलर के बीच रह सकता है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और दुनिया के बाजारों का माहौल रुपये पर असर डालेंगे।
रुपये की गिरावट का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा और बाजार नीचे बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रुपये में कमजोरी आगे भी जारी रही, तो यह शेयर बाजार के लिए चिंता बढ़ा सकती है। देश में आने और बाहर जाने वाले विदेशी पैसे का फर्क भी बाजार की चाल पर असर डाल सकता है।

