
आज मजबूत लेकिन कल का क्या? RBI गवर्नर ने Financial Crisis को लेकर दी बड़ी चेतावनी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय सिस्टम को लेकर अहम बात कही है। उनका कहना है कि भारत पश्चिम एशिया संकट का सामना मजबूत स्थिति से कर रहा है, लेकिन भविष्य के जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साइबर अटैक और टेक्नोलॉजी फेलियर भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।

In Short
- पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत मजबूत स्थिति में: RBI गवर्नर।
- अगला वित्तीय संकट साइबर अटैक या टेक्नोलॉजी फेल होने से भी आ सकता है।
- भविष्य के झटकों से निपटने के लिए पूरे वित्तीय सिस्टम को मजबूत करना जरूरी।
भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया संकट के बीच मजबूत स्थिति में है, लेकिन मौजूदा मजबूती का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में किसी संकट का असर नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में यह बात कही। उन्होंने वित्तीय सिस्टम को भविष्य के झटकों के लिए और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
मल्होत्रा ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया संकट का सामना मजबूत स्थिति से कर रहा है, लेकिन इस समय लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले साल रिटेल महंगाई औसतन 2 फीसदी रही और भारत ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे मजबूत ग्रोथ दर्ज की।
पश्चिम एशिया संकट से भारत पर भी असर
RBI गवर्नर के मुताबिक, मजबूत आर्थिक बुनियाद और मजबूत वित्तीय सिस्टम भारत को मौजूदा झटकों का सामना करने का भरोसा देते हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत पर कमोडिटी की ऊंची कीमतों और बाहरी क्षेत्र के दबाव का असर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा हालात का सामना मजबूत स्थिति से कर रही है।
इन कदमों से बढ़ाई जा रही मजबूती
संजय मल्होत्रा ने बताया कि ऐसे झटकों से निपटने के लिए भारत कई कदम उठा रहा है। इनमें आयात के स्रोतों में विविधता लाना, ऊर्जा और दूसरे जरूरी संसाधनों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार करना शामिल है।
इसके अलावा एनर्जी ट्रांजिशन को तेज करने, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने, ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ जुड़ाव बढ़ाने और अलग-अलग देशों के साथ ट्रेड समझौते करके बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
अगला वित्तीय संकट कहीं और से भी शुरू हो सकता है
RBI गवर्नर ने कहा कि वित्तीय स्थिरता का मतलब संकट को पूरी तरह रोकना नहीं है, बल्कि ऐसे झटकों का सामना करने के लिए सिस्टम को मजबूत बनाना है।

उन्होंने आगाह किया कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं कि वित्तीय दुनिया से ही शुरू हो। इसकी शुरुआत किसी भू-राजनीतिक घटना, साइबर अटैक या टेक्नोलॉजी से जुड़ी खराबी से भी हो सकती है, जिसका असर कई रास्तों से वित्तीय सिस्टम तक पहुंच सकता है।
पूरे सिस्टम को मजबूत बनाना जरूरी
मल्होत्रा के मुताबिक, जोखिमों की निगरानी और आकलन को बेहतर करने के लिए ज्यादा बेहतर और बारीक डेटा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सिर्फ मजबूत बैंकिंग सिस्टम होना काफी नहीं है।
वित्तीय बाजार, पेमेंट सिस्टम, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स, जरूरी थर्ड पार्टी और सीमा पार वित्तीय नेटवर्क तक पूरे सिस्टम को मजबूत बनाना होगा। उनके मुताबिक, चुनौती ऐसा वित्तीय सिस्टम तैयार करने की है जो उन झटकों का भी सामना कर सके, जिनका पहले से अंदाजा लगाना संभव नहीं है।

