ओमान से गुजरात तक गैस पाइपलाइन की चर्चाओं पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी, कही ये बड़ी बात
ओमान से भारत तक प्रस्तावित गैस पाइपलाइन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने बड़ा बयान जारी किया है। मंत्रालय की सफाई के बाद इस परियोजना को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों चर्चा में है यह योजना? जानिए पूरी खबर।

In Short
- सरकार ने साफ किया कि भारत-ओमान गहरे समुद्र गैस पाइपलाइन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में सप्लाई रुकने के डर और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के विकल्प के रूप में इस ₹40,000 करोड़ के प्रोजेक्ट की चर्चा थी।
- भारी लागत और 3,000 मीटर की गहराई जैसी तकनीकी चुनौतियों के कारण यह प्रोजेक्ट 3 दशक से सिर्फ कागजों पर ही है।
भारत को ओमान और दूसरे खाड़ी देशों से जोड़ने वाली गहरे समुद्र की गैस पाइपलाइन को लेकर चल रही अटकलों पर सरकार ने विराम लगा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने मंगलवार को साफ कहा कि फिलहाल ऐसी किसी पाइपलाइन परियोजना पर सरकार काम नहीं कर रही है और न ही उसके पास इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है।
मंत्रालय ने दी सफाई: कोई चर्चा नहीं चल रही
मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी कर बताया कि उसने 'मध्य पूर्व-भारत डीपवाटर पाइपलाइन' (MEIDP) से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया है। इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि गुजरात को ओमान और खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों से जोड़ने वाली गहरे समुद्र की पाइपलाइन पर काम चल रहा है।
मंत्रालय ने कहा, "पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय यह स्पष्ट करना चाहता है कि इस तरह का कोई भी प्रस्ताव फिलहाल उसके विचाराधीन नहीं है।" मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि इस परियोजना को लेकर ओमान या किसी अन्य खाड़ी देश के साथ किसी भी स्तर पर कोई सक्रिय बातचीत नहीं हो रही है।
क्यों उठी थी इस पाइपलाइन की चर्चा?
हाल की कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ओमान से गहरे समुद्र में गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना पर फिर से विचार कर सकता है। इसके पीछे एक बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी चिंताएं बताई जा रही थीं।
यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी पाइपलाइन भारत की समुद्री ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भरता कम कर सकती है।
क्या था रिपोर्टों में दावा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन की लागत करीब ₹40,000 करोड़ आंकी गई थी। यह लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी पानी के नीचे की पाइपलाइन होती, जो ओमान से सीधे गुजरात तक प्राकृतिक गैस पहुंचाती।
खबरों में यह भी कहा गया था कि पाइपलाइन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से ज्यादा गहराई में होगा, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी सबसी पाइपलाइन परियोजनाओं में शामिल हो सकती थी। रिपोर्टों के अनुसार, गैस परिवहन की लागत करीब 2 से 2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (MMBTU) रहने का अनुमान था।
तीन दशकों से कागजों पर अटकी है योजना
आपको बता दें कि यह परियोजना पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से केवल कागजों पर ही अटकी हुई है।पिछले 30 साल से ज्यादा समय से इस पाइपलाइन की चर्चा होती रही है, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। इसकी बड़ी वजह परियोजना की भारी लागत, मुश्किल तकनीकी चुनौतियां और इसके फायदे-नुकसान को लेकर बने सवाल रहे हैं।
अब मंत्रालय की तरफ से साफ इनकार के बाद इस परियोजना को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

