BTIndia@100: मौजूदा आर्थिक मॉडल पर पी चिदंबरम का हमला, बोले नियमों के जाल में फंसी है अर्थव्यवस्था
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भारत के मौजूदा आर्थिक मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ज्यादा नियम, जांच और नौकरशाही की रुकावटें कारोबार के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर निवेश, FTA और बाजार में घटती प्रतिस्पर्धा को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल किए।

India@100 2026: भारत के मौजूदा आर्थिक मॉडल को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह मॉडल जमीनी हालात के गहरे आकलन और आर्थिक विशेषज्ञता पर आधारित नहीं है। उन्होंने रेगुलेशन, जांच और कार्रवाई, क्रोनी कैपिटलिज्म और नौकरशाही की रुकावटों को अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बताया।
BusinessTodayIndia@100 में बातचीत के दौरान पी चिदंबरम ने कहा कि मजबूत राजनीतिक नेतृत्व के साथ आर्थिक मामलों की गहरी समझ रखने वाले लोगों की भी जरूरत होती है। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह का उदाहरण दिया।
लाइसेंस राज नहीं अब नियमों का राज
चिदंबरम ने कहा कि देश में इस समय नियमों और रेगुलेशन का ऐसा सिस्टम है जो पुराने लाइसेंस राज जितना मुश्किल बन गया है। उनके मुताबिक, आज नियमों की स्थिति 1991 के मुकाबले भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने मौजूदा आर्थिक व्यवस्था को रेगुलेशन, जांच और कार्रवाई, क्रोनी कैपिटलिज्म और नौकरशाही की रुकावटों के बीच फंसा हुआ बताया।
सेमीकंडक्टर योजना पर उठाया सवाल
देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की कोशिशों पर चिदंबरम ने सेमीकंडक्टर सेक्टर का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने वाली कंपनियों को 80 से 85 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है और इसमें बड़ी हिस्सेदारी सरकारी पैसे की है।
उन्होंने कहा कि इन पहलों के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी करीब 14 फीसदी पर है।
बड़े देशों के साथ FTA कहां हैं?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को लेकर भी चिदंबरम ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत के कई समझौते ऐसे छोटे देशों के साथ हैं जहां व्यापार सीमित है।
उन्होंने अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और चीन जैसे बड़े ट्रेड पार्टनर्स का जिक्र करते हुए पूछा कि इनके साथ FTA कहां हैं। उन्होंने अमेरिका और चीन के साथ समझौते की अपनी अलग चुनौतियों का भी जिक्र किया।
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर
चिदंबरम ने कहा कि भारत चीन से कच्चा माल, कैपिटल गुड्स और दूसरे सामान आयात करता है। जहां संभव हो वहां देश को अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित कर आयात का विकल्प तैयार करना चाहिए।
उन्होंने बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने का भी मुद्दा उठाया। टेलीकॉम, पेट्रोलियम, सीमेंट, स्टील, एयरपोर्ट और पोर्ट जैसे सेक्टर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में मोनोपॉली या कुछ कंपनियों का दबदबा बढ़ रहा है। उन्होंने कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाया।

