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जामनगर पहुंचे मार्को रुबियो, मुकेश अंबानी की रिफाइनरी पर अमेरिका की नजर क्यों?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जामनगर दौरे ने भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों को चर्चा में ला दिया है। मुकेश अंबानी की रिफाइनरी में वेनेजुएला के तेल को लेकर बातचीत अहम मानी जा रही है। आखिर भारत की रिफाइनिंग क्षमता अमेरिका के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है और इसका ऊर्जा कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है?

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In Short

  • मार्को रुबियो ने रिलायंस रिफाइनरी में वेनेजुएला के तेल पर चर्चा की।
  • जामनगर रिफाइनरी रोजाना 14 लाख बैरल तेल प्रोसेस कर सकती है।
  • अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा कारोबार बढ़ाना चाहता है।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर पहुंचे। यहां वह अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की विशाल रिफाइनरी का दौरा कर रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका वेनेजुएला के कच्चे तेल के लिए नए बाजार तलाश रहा है और भारत से रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। इस दौरे से भारत-अमेरिका के ऊर्जा संबंधों का महत्व भी सामने आया है।

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जामनगर क्यों पहुंचे मार्को रुबियो?

एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो ने कहा कि वह रिलायंस के साथ वेनेजुएला के तेल के प्रसंस्करण को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ने पर भारत वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।

मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया। उन्होंने कहा कि रिलायंस के पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है और कंपनी पहले भी ऐसा कर चुकी है।

क्यों खास है जामनगर की रिफाइनरी?

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, जामनगर रिफाइनरी में रोजाना करीब 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। यह दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक है।

यहां कच्चे तेल से पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर और अन्य औद्योगिक उत्पाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी तैयार होते हैं।

रुबियो के मुताबिक, इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा हो सकती है। ईरान और यमन से जुड़े संघर्षों और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे के बीच तेल की आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऊर्जा की कमी से अर्थव्यवस्थाएं संकट में आ सकती हैं और देश इसके लिए युद्ध तक लड़ते हैं।

भारत-अमेरिका के ऊर्जा संबंधों में रिलायंस की भूमिका

रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत के बड़े निजी कारोबारी समूहों में शामिल है। इसका कारोबार तेल, गैस, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम, रिटेल और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में फैला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च में टेक्सास के ब्राउन्सविल में 300 अरब डॉलर की प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना की घोषणा की थी, जिसे रिलायंस इंडस्ट्रीज का समर्थन प्राप्त है।

जामनगर फिर क्यों चर्चा में है?

जामनगर पहले भी अंबानी परिवार के भव्य आयोजनों के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है। मार्च 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट के विवाह-पूर्व समारोह में दुनियाभर के कारोबारी नेताओं, मशहूर हस्तियों और राजनीतिक हस्तियों ने हिस्सा लिया था।

अब मार्को रुबियो के दौरे के साथ जामनगर की रिफाइनरी एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, सुरक्षा और भारत-अमेरिका संबंधों के केंद्र में आ गई है।

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