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Rupee vs Dollar: 95.76 पर पहुंचा रुपया! RBI ने उठाए कई बड़े कदम, फिर भी एक्सपर्ट्स को क्यों सता रही चिंता?

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में सोमवार को 97 पैसे की जोरदार तेजी आई और यह 95.76 के स्तर पर खुला। RBI ने रुपये को संभालने के लिए तेल कंपनियों की डॉलर खरीद और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़े कई नियम बदले हैं। लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल के बीच सवाल है कि क्या यह मजबूती टिक पाएगी?

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सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे की मजबूती के साथ खुला।
सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे की मजबूती के साथ खुला।

In Short

  • डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे मजबूत होकर 95.76 पर खुला।
  • RBI ने तेल कंपनियों की डॉलर खरीद और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नियम बदले।
  • अक्टूबर में 9 तारीख तक विदेशी निवेशकों ने ₹44,166 करोड़ निकाले।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में सोमवार को जोरदार रिकवरी देखने को मिली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से उठाए गए नए कदमों के बाद रुपया 97 पैसे की मजबूती के साथ 95.76 प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI के फैसलों से रुपये को फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि में मजबूती के लिए कुछ और बड़े बदलाव जरूरी होंगे।

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दरअसल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से रुपये पर दबाव बना हुआ है। 9 अक्टूबर को रुपया 96.72 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि मई में यह 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।

रुपये को संभालने के लिए RBI ने क्या किया?

RBI ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियां चुनिंदा बैंकों के जरिए सीधे RBI से डॉलर खरीद सकेंगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे हर महीने करीब 11 से 12 अरब डॉलर की मांग खुले बाजार से हट सकती है।

इसके अलावा RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम सख्त किए हैं। बिना वास्तविक लेनदेन का प्रमाण दिए ऐसे सौदे करने की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है। साथ ही 20 लाख डॉलर से बड़े सौदों पर बैंकों को 20% रुपये के बराबर रिजर्व रखना होगा। इससे सट्टेबाजी कम होने की उम्मीद है, हालांकि हेजिंग की लागत बढ़ सकती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी चुनौती

RBI की कोशिशों के बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली चिंता बढ़ा रही है। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में 9 तारीख तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से ₹44,166 करोड़ निकाले। यह सितंबर के पूरे महीने में निकाले गए ₹35,861 करोड़ से भी ज्यादा है।

अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5% और 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.6% से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों के बजाय अमेरिकी बॉन्ड में पैसा लगाना ज्यादा पसंद कर सकते हैं।

क्या RBI को फिर बढ़ानी पड़ेंगी ब्याज दरें?

RBI ने पिछले सप्ताह रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरें 50 से 75 बेसिस पॉइंट और बढ़ानी पड़ सकती हैं।

नोमुरा की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा के मुताबिक, RBI के नए कदम सट्टेबाजी रोकने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इससे विदेशी मुद्रा बाजार में नकदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन उपायों की सफलता काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

रुपये में स्थायी मजबूती के लिए क्या जरूरी?

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एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा का मानना है कि RBI के फैसले कुछ समय की राहत दे सकते हैं, लेकिन रुपये की कमजोरी की असली वजहों को दूर करना जरूरी है। उनके मुताबिक, स्थायी विदेशी निवेश बढ़ाने, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और आयातित तेल पर निर्भरता घटाने की जरूरत है।

सिस्टमैटिक्स ग्रुप के धनंजय सिन्हा ने भी कहा कि सट्टेबाजी पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को निजी निवेश बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और बेहतर विदेशी पूंजी आकर्षित करने पर ध्यान देना होगा। यानी RBI के नए कदम रुपये को संभालने के लिए समय दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय की मजबूती आर्थिक सुधारों पर निर्भर करेगी।