ग्लोबल ट्रेड में भारत के लिए नए मौके, लेकिन बढ़ते इंपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन! जानें क्या कहते हैं आंकड़े
अमेरिकी टैरिफ, चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई संकट के बीच ग्लोबल ट्रेड की तस्वीर बदल रही है। भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ाने के नए मौके बन रहे हैं, लेकिन तेजी से बढ़ता इंपोर्ट चिंता बढ़ा रहा है। जानिए मैकिन्से की रिपोर्ट में क्या सामने आया।

In Short
- जनवरी-मई 2026 में भारत का एक्सपोर्ट 4.4% और इंपोर्ट 13% बढ़ा।
- चीन के साथ भारत का व्यापार 24% बढ़कर 69 अरब डॉलर पहुंचा।
- सितंबर 2026 में भारत का व्यापार घाटा 30.21 अरब डॉलर रहा।
दुनियाभर में बदलते व्यापारिक हालात भारत के लिए नए मौके लेकर आए हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अमेरिका के टैरिफ, चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई की दिक्कतों ने ग्लोबल ट्रेड की तस्वीर बदल दी है। भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ाने का मौका है, लेकिन तेजी से बढ़ता इंपोर्ट चिंता का विषय बना हुआ है। मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट (McKinsey Global Institute) की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में कई अहम बातें सामने आई हैं।
एक्सपोर्ट से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा इंपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से मई 2026 के बीच भारत का सामानों का एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 4.4% बढ़ा, जबकि इंपोर्ट में 13% की बढ़ोतरी हुई। इससे व्यापार घाटा 28% बढ़ गया।
हालांकि, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स का इंपोर्ट घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। असली चुनौती इन पार्ट्स से ज्यादा कीमत वाले तैयार प्रोडक्ट बनाकर विदेशों में बेचने की है।
तेल संकट से भारत को कैसे मिल सकता है फायदा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने से कई देशों को तेल के लिए नए विकल्प तलाशने पड़े हैं। इसका फायदा भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को मिल सकता है।
जनवरी-मई 2026 में भारत के कुल इंपोर्ट में मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत अंक घटी। भारत ने रूस और ब्राजील जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदना बढ़ाया।
वहीं, ASEAN और अफ्रीकी देशों में भारतीय रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी। हालांकि, महंगा कच्चा तेल और शिपिंग खर्च मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं।
चीन पर निर्भरता क्यों बनी चुनौती?
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-मई 2026 में भारत और चीन के बीच सामानों का व्यापार 24% बढ़कर 69 अरब डॉलर पहुंच गया।
भारत चीन से टेलीकॉम कंपोनेंट्स, बैटरी और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सामान खरीदता है। इससे घरेलू कंपनियों को उत्पादन में मदद मिलती है, लेकिन विदेशी सप्लाई पर निर्भरता भी बढ़ती है।
अमेरिका के साथ व्यापार में क्या बदला?
जनवरी-मई 2026 में अमेरिका के साथ भारत का कुल सामानों का व्यापार 0.5% घटकर 63 अरब डॉलर रहा। इस दौरान अमेरिका को एक्सपोर्ट 11% गिरा, जबकि वहां से इंपोर्ट 23% बढ़ा।
दवाओं और हीरों के एक्सपोर्ट में कमजोरी रही। वहीं, स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
किन सेक्टर्स में भारत के लिए मौका?
इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 11% बढ़ा, लेकिन इंपोर्ट 27% बढ़ गया। ट्रांसपोर्टेशन इक्विपमेंट के एक्सपोर्ट में 14% की बढ़ोतरी हुई। AI से जुड़े सेमीकंडक्टर और सर्वर की बढ़ती मांग भी भारत के लिए अवसर बन सकती है।
सितंबर में कितना रहा व्यापार घाटा?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत का एक्सपोर्ट 44.40 अरब डॉलर और इंपोर्ट 74.61 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा बढ़कर 30.21 अरब डॉलर पहुंच गया, जो अगस्त में 26.86 अरब डॉलर था।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को एक्सपोर्ट के नए बाजार तलाशने, घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करने और तेल आयात के विकल्प बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

