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नवंबर में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, 2027 के चुनावों से पहले कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका

ब्लूमबर्ग ने Oxford Economics के रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इस रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अगले साल होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से पहले सरकार के पास फ्यूल की कीमतें बढ़ाने का यह आखिरी बड़ा मौका हो सकता है।

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भारत में नवंबर के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। ब्लूमबर्ग ने Oxford Economics के रिपोर्ट के हवाले से बताया कि इस रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अगले साल होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से पहले सरकार के पास फ्यूल की कीमतें बढ़ाने का यह आखिरी बड़ा मौका हो सकता है। अगर पेट्रोल-डीजल महंगे होते हैं, तो इसका असर आम लोगों की जेब के साथ महंगाई के आंकड़ों पर भी दिखाई दे सकता है।

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नवंबर में क्यों बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक Oxford Economics की लीड इकोनॉमिस्ट एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद द्वारा जारी एक नोट के हवाले से कहा कि नवंबर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का आखिरी व्यावहारिक मौका हो सकता है। इसकी वजह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। साल 2027 में सात राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में मार्च से मई के बीच मतदान होगा। ऐसे में चुनाव प्रचार तेज होने से पहले सरकार फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है।

कितने बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी मई में हुई कुल 7.5% की बढ़ोतरी के मुकाबले लगभग आधी हो सकती है। यानी कीमतों में करीब 3.75% का इजाफा होने का अनुमान है। मई में मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई थीं। उसके बाद से पंप पर कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है।

महंगाई 6.5% तक पहुंचने का अनुमान

Oxford Economics का अनुमान है कि ईंधन महंगा होने से अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में खुदरा महंगाई 6.2% और जनवरी-मार्च 2027 तिमाही में 6.5% तक पहुंच सकती है।

ये दोनों आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2% से 6% के निर्धारित महंगाई दायरे से ऊपर होंगे। हालांकि, RBI का अनुमान इससे अलग है। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में महंगाई 6% और जनवरी-मार्च में घटकर 5.7% रहने की उम्मीद जताई है। पूरे वित्त वर्ष के लिए Oxford Economics ने महंगाई 5.4% रहने का अनुमान लगाया है, जबकि RBI का अनुमान 5.2% है।

क्या RBI फिर बढ़ाएगा ब्याज दरें?

सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54% पहुंच गई, जो 2024 के आखिर के बाद सबसे ज्यादा है। अगस्त में यह 4.83% थी।
Oxford Economics के मुताबिक, महंगाई ऊंची रहने पर RBI दिसंबर और फरवरी की मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरें 0.25-0.25 प्रतिशत अंक बढ़ा सकता है। अक्टूबर में भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की थी।

हालांकि, अगर नवंबर में ईंधन महंगा नहीं होता, तो आने वाली तिमाहियों के लिए Oxford Economics के महंगाई अनुमानों में 0.10 से 0.30 प्रतिशत अंक की कमी आ सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि RBI के हालिया कदम रुपये में उतार-चढ़ाव को सीमित कर सकते हैं, लेकिन महंगा कच्चा तेल और विदेशी वित्तपोषण का दबाव रुपये की स्थिरता के लिए चुनौती बने रहेंगे।

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