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ईवी बैटरी बनाने में भारत को मिलेगी नई ताकत! 4 राज्यों में प्लांट लगाने के लिए सरकार का तगड़ा प्लान

केंद्र सरकार लिथियम और निकेल जैसे जरूरी खनिजों की प्रोसेसिंग बढ़ाने के लिए बड़ी योजना पर विचार कर सकती है। इसके तहत कंपनियों को आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार ने कुछ राज्यों की पहचान भी की है। जानिए इस योजना से किन कंपनियों को फायदा मिल सकता है और क्या है पूरा प्रस्ताव।

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In Short

  • केंद्र सरकार लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग के लिए ₹2,800 करोड़ की योजना पर विचार कर सकती है।
  • प्रस्तावित योजना के तहत चार प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर कंपनियों को 30% तक कैपिटल सब्सिडी मिल सकती है।
  • आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क बनाने की तैयारी है।

Cabinet Meeting: केंद्र सरकार देश में लिथियम और निकेल जैसे जरूरी खनिजों की प्रोसेसिंग बढ़ाने के लिए एक नई योजना लाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट आज यानी बुधवार 4 नवंबर को 2,800 करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजना पर विचार कर सकती है। इस योजना के तहत देश में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने वाली कंपनियों को सरकार आर्थिक मदद दे सकती है। इसका मकसद भारत में इन खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

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चार प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की तैयारी

बिजनेस टुडे को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत देश में कुल चार प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। इनमें दो प्लांट लिथियम और दो निकेल की प्रोसेसिंग के लिए होंगे।

लिथियम प्रोसेसिंग के दोनों प्लांट की न्यूनतम क्षमता 30-30 हजार टन होगी। वहीं निकेल प्रोसेसिंग के दोनों प्लांट की न्यूनतम क्षमता 50-50 हजार टन रखी जाएगी। इन प्लांट में लिथियम और निकेल के अयस्कों के साथ-साथ बीच के प्रोसेसिंग चरणों से मिले उत्पादों को ज्यादा शुद्धता वाले कंपाउंड में बदला जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, निकेल की प्रोसेसिंग के दौरान कोबाल्ट भी एक बाय-प्रोडक्ट के रूप में मिलने की उम्मीद है।

कंपनियों को मिलेगी 30% तक सब्सिडी

प्रस्तावित योजना के मुताबिक, सरकार प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए पात्र पूंजी निवेश पर 30% तक सब्सिडी दे सकती है। हालांकि, इसके लिए अधिकतम आर्थिक मदद की सीमा भी तय की जा सकती है।

लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट लगाने वाली प्रत्येक लाभार्थी कंपनी को अधिकतम 500 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है। वहीं निकेल प्रोसेसिंग प्लांट के लिए यह सीमा 900 करोड़ रुपये प्रति लाभार्थी रखी जा सकती है।

इन चार राज्यों में बन सकते हैं प्रोसेसिंग पार्क

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क बनाने के लिए चार राज्यों की पहचान की है। इनमें आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।

इन राज्यों में प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे देश में जरूरी खनिजों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिल सके।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों और बैटरी उद्योग को फायदा

लिथियम, निकेल और कोबाल्ट का इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरी बनाने में होता है। ये बैटरियां इलेक्ट्रिक गाड़ियों, स्मार्टफोन और कई दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल की जाती हैं।

देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों, रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती जरूरतों के चलते इन खनिजों की मांग भी बढ़ रही है।

भारत के लिए सिर्फ इन खनिजों की सप्लाई हासिल करना ही जरूरी नहीं है, बल्कि देश में इनकी प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना भी अहम है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और बैटरी व इलेक्ट्रिक व्हीकल की सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

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