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भारत पर लगेगा 100% US टैरिफ? रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी संसद में बिल पर होगा वोट

रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी संसद में एक ऐसे बिल पर चर्चा हो रही है, जिसमें भारत समेत कई देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। अब सबकी नजर हाउस वोट और इस बिल के अंतिम फैसले पर टिकी है। पढ़ें पूरी खबर।

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AI Generated Image

In Short

  • रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका में नया प्रतिबंध बिल, भारत समेत कई देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव।
  • अमेरिकी हाउस में रूस प्रतिबंध बिल पर अंतिम वोट की तैयारी।
  • बिल पास होने पर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले बिल को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बिल के तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है। अगर यह प्रावधान अंतिम रूप से मंजूर होता है, तो भारत और चीन जैसे देशों पर इसका असर पड़ सकता है।

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हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में गुरुवार को अंतिम वोट

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) रूस प्रतिबंध बिल को अंतिम वोट के लिए आगे बढ़ा रही है। सांसद इस बिल में आखिरी समय में बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं।

डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने एक संशोधन पेश किया है, जिसमें भारत, चीन और कुछ अन्य देशों का नाम सीधे तौर पर शामिल किया गया है। इस संशोधन के तहत इन देशों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों के तहत 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

कौन-कौन से देश सूची में शामिल हैं?

होयर के प्रस्तावित संशोधन में जिन देशों के नाम शामिल हैं, उनमें भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, UAE, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।

अमेरिका का कहना है कि रूस से कच्चे तेल का व्यापार जारी रखने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि वॉशिंगटन के अनुसार इससे रूस को राजस्व मिल रहा है।

Image Credit : Aaj Tak

रूस के ऊर्जा सेक्टर को निशाना बनाने की तैयारी

यह बिल Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 के नाम से जाना जा रहा है। इसे अमेरिकी सीनेट में 7 अगस्त को 86-11 वोट से मंजूरी मिल चुकी है।

इस कानून का उद्देश्य रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और कथित "शैडो फ्लीट" को निशाना बनाना है। अमेरिका का आरोप है कि ये जहाज रूस को तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

हाउस संशोधन में भारत-चीन का नाम

अमेरिकी सीनेट से पास हुए बिल में रूस के व्यापारिक साझेदार देशों के नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं थे। इसमें रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े पांच आयातकों का जिक्र किया गया था।

हालांकि, हाउस में पेश संशोधन में भारत और चीन समेत कुछ देशों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल किए गए हैं।

टैरिफ प्रावधान हटाने का भी प्रस्ताव

अमेरिकी संसद में एक अन्य संशोधन ऐसा भी पेश किया गया है, जिसमें टैरिफ लगाने वाले हिस्से को हटाने की मांग की गई है।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलने के बाद ही यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा।

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भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर संभव

अगर हाउस इस बिल को मंजूरी देता है और टैरिफ वाला प्रावधान बरकरार रहता है, तो रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है।

हालांकि, बिल का अंतिम स्वरूप इस बात पर निर्भर करेगा कि वोट से पहले कौन-कौन से संशोधन स्वीकार किए जाते हैं।