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दूध से आगे बढ़ी डेयरी इंडस्ट्री! प्रीमियम प्रोडक्ट्स और स्मार्ट मार्केटिंग से बदल रही ग्राहकों की पसंद

व्हाइट रिवॉल्यूशन के पांच दशक बाद भारत का डेयरी सेक्टर नए बदलाव के दौर में है। अब उपभोक्ता सिर्फ दूध नहीं, बल्कि पनीर, चीज, प्रोबायोटिक योगर्ट और अन्य प्रीमियम डेयरी प्रोडक्ट्स को अपना रहे हैं। जानिए कैसे स्मार्ट मार्केटिंग और ब्रांडेड कंपनियां इस तेजी से बढ़ते बाजार की तस्वीर बदल रही हैं।

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सिद्धार्थ जराबी, ग्रुप एडिटर बिजनेस टुडे - संपादकीय 

व्हाइट रिवॉल्यूशन (White Revolution) ने भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोडक्शन बने हुए पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है। अब देश वैल्यू-ऐडेड डेयरी प्रोडक्ट के दौर से गुजर रहा है, जहां पारंपरिक दूध की जगह उससे जुड़े प्रीमियम प्रोडक्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

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1990 के दशक का मशहूर जिंगल "दूध दूध, पियो ग्लासफुल" जहां शहरी युवाओं के बीच दूध को लोकप्रिय बनाने में सफल रहा, वहीं प्रतिष्ठित अमूल गर्ल ने भी इस पहचान को और मजबूत किया। अब स्मार्ट मार्केटिंग दूध को एक नए और आकर्षक रूप में पेश कर रही है। "दुनिया का सबसे ज्यादा प्रोटीन वाला पनीर", लैक्टोज-फ्री दूध और प्रोबायोटिक योगर्ट जैसे उत्पादों के जरिए उपभोक्ताओं को सिर्फ तरल दूध तक सीमित रहने के बजाय अधिक प्रीमियम और ज्यादा मुनाफे वाले डेयरी उत्पाद अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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यह बदलाव अब रोजमर्रा की जिंदगी में भी साफ दिखाई देने लगा है। मोहल्ले का दूधवाला आज भी बड़े धातु के कनस्तरों में दूध पहुंचाता है और स्थानीय दुकानों पर अब भी मिट्टी के बर्तनों में दही और खुले ट्रे में पनीर बिकता है। लेकिन अब कंपनियां इन्हीं पारंपरिक उत्पादों को आकर्षक ब्रांडेड पैकेजिंग में पेश कर रही हैं और उन्हें अधिक स्वच्छ, शुद्ध और भरोसेमंद बताकर बेच रही हैं, जिसके लिए उपभोक्ताओं से कहीं अधिक कीमत भी ली जा रही है। हमारी कवर स्टोरी में कृष्ण गोपालन ने विस्तार से बताया है कि किस तरह प्रमुख डेयरी ब्रांड असंगठित क्षेत्र से बाजार हिस्सेदारी हासिल कर रहे हैं।

अमूल अपने विशाल खरीद नेटवर्क का लाभ उठाकर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कई तरह के उत्पाद उपलब्ध करा रहा है। वहीं, हैटसन एग्रो अपने प्रीमियम आइसक्रीम पार्लरों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बना रहा है। पराग मिल्क फूड्स ने चीज और होम डिलीवरी वाले प्रीमियम दूध के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दूसरी ओर मिल्की मिस्ट मोटे और क्रीमी आइसलैंडिक डेयरी उत्पाद स्कायर (Skyr) को घर के बने दही के हाई-प्रोटीन विकल्प के रूप में बाजार में उतार रही है।

जहां वैल्यू-ऐडेड डेयरी उद्योग भारत की बढ़ती उपभोक्ता अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करता है, वहीं बाहरी चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ते तनाव ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। सुरभि ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत ने चार महीने तक कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों के झटकों का मजबूती से सामना किया, लेकिन इस युद्ध का असर अब आम लोगों के घरेलू बजट तक पहुंच चुका है और उनकी खरीदने की क्षमता पर भी असर पड़ा है।

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आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बना रह सकता है, जबकि अनियमित मानसून आर्थिक विकास की रफ्तार को भी प्रभावित कर सकता है। देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हुई है तो कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा देखने को मिली है। आगे की स्थिति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है या नहीं, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है या नहीं और प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश की स्थिति कैसी रहती है।

इसी अंक में ममता शर्मा ने यह भी बताया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और बदलती जनसांख्यिकी किस तरह कार्यस्थलों की भूमिकाओं और कॉरपोरेट रणनीतियों को नया स्वरूप दे रही हैं। जिन भूमिकाओं में मौलिक सोच और अस्थिर कारोबारी परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता की जरूरत होती है, वहां अनुभवी पेशेवरों की अहमियत आज भी बनी हुई है। साथ ही, तेजी से बदलती तकनीक के दौर में प्रबंधकों के लिए जरूरी हो गया है कि वे लगातार खुद को नई तकनीकों के अनुरूप ढालें और अपने कौशल को लगातार बेहतर बनाते रहें।

आने वाले वर्षों में पेशेवरों की सफलता और करियर में आगे बढ़ने की क्षमता पहले से कहीं अधिक इस बात पर निर्भर करेगी कि वे पुरानी सोच और धारणाओं को कितनी जल्दी छोड़ पाते हैं, अहंकार से ऊपर उठकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कितने संतुलित और विवेकपूर्ण फैसले ले पाते हैं।

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