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हिमाचल में सेब की पैदावार में भारी गिरावट! खराब मौसम ने बिगाड़ा खेल, विदेशों में सप्लाई भी प्रभावित

हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब की खेती को बड़ा झटका लगा है। खराब मौसम ने न सिर्फ उत्पादन घटाया है, बल्कि सेब की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है। घरेलू बाजार में सप्लाई कम होने के साथ एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ा है। जानिए कितनी घटी पैदावार और आगे क्या चुनौतियां हैं।

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In Short

  • हिमाचल प्रदेश में खराब मौसम के कारण इस साल सेब का उत्पादन सामान्य स्तर के मुकाबले करीब एक तिहाई रह गया।
  • सेब की पैदावार के साथ क्वालिटी भी प्रभावित हुई, घरेलू सप्लाई घटी और एक्सपोर्ट के लिए बेहद कम सेब बचे।
  • समय से पहले बर्फबारी और अल नीनो के असर से अगले साल की सेब की फसल को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब की पैदावार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। पिछले एक साल से खराब मौसम और बदलती मौसमी परिस्थितियों ने सेब की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका असर सिर्फ उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि सेब की क्वालिटी पर भी पड़ा है। पैदावार कम होने से घरेलू बाजार में सेब की सप्लाई घट गई है और एक्सपोर्ट के लिए भी बहुत कम सेब बचा है।

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3 करोड़ की जगह सिर्फ 1 करोड़ बॉक्स का उत्पादन

एप्पल ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रविंदर चौहान ने बताया कि इस साल हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल काफी कमजोर रही है। उनके मुताबिक, पिछले एक साल के दौरान खराब मौसम के कारण सेब का उत्पादन घटा है और फलों की क्वालिटी भी अच्छी नहीं रही।

उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में हिमाचल प्रदेश में करीब 3 करोड़ बॉक्स सेब का उत्पादन हो सकता है, लेकिन इस साल सिर्फ 1 करोड़ बॉक्स का उत्पादन हुआ है। हर बॉक्स में 24 सेब होते हैं। यानी इस बार उत्पादन सामान्य स्तर के मुकाबले करीब एक तिहाई रह गया है।

चौहान के मुताबिक, इस साल हिमाचल प्रदेश से एक्सपोर्ट करने के लिए मुश्किल से ही सेब उपलब्ध हैं। घरेलू मांग का कुछ हिस्सा आयात किए गए सेब से पूरा किया जा रहा है।

अगले साल भी सेब की फसल पर संकट?

सेब उत्पादकों की चिंता सिर्फ इस साल तक सीमित नहीं है। हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में इस बार समय से पहले बर्फबारी हुई है। इसके अलावा अल नीनो (El Niño) के प्रभाव ने भी अगले साल की फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

भारत में सबसे ज्यादा सेब का उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश दूसरे नंबर पर आता है। देश के कुल सेब उत्पादन में हिमाचल की हिस्सेदारी करीब 20 से 22 प्रतिशत है।

Image Credit: ITG

पश्चिम एशिया में युद्ध से फलों के एक्सपोर्ट को झटका

इस साल भारत के ताजे फलों के एक्सपोर्ट पर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का भी असर पड़ा है। यह इलाका भारतीय फल और सब्जियों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। युद्ध के कारण लॉजिस्टिक्स में आई परेशानियों ने दूसरे देशों में होने वाली सप्लाई को भी प्रभावित किया है।

अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत का केले का एक्सपोर्ट 45.39 प्रतिशत गिरकर 9.504 करोड़ डॉलर रह गया। वहीं, ताजे अंगूरों का एक्सपोर्ट करीब 27 प्रतिशत घटकर 5.087 करोड़ डॉलर पर आ गया। आम के एक्सपोर्ट में भी इसी तरह गिरावट दर्ज की गई।

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फलों के एक्सपोर्ट में गिरावट, फिर भी कुल निर्यात बढ़ा

फलों के एक्सपोर्ट में गिरावट के बावजूद भारत के कुल वस्तु निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। सितंबर 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 23.9 प्रतिशत बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच गया। सितंबर 2025 में यह 36.08 अरब डॉलर था।

वहीं, अप्रैल से सितंबर 2026-27 के दौरान कुल वस्तु निर्यात 259.89 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 219.30 अरब डॉलर के मुकाबले 18.51 प्रतिशत ज्यादा है।