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अमेरिका में नौकरी कर रहे लाखों भारतीयों की बढ़ सकती है मुश्किल! H-1B और L-1 वीजा पर बड़े बदलाव की तैयारी

अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा रिन्यूअल की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है। ट्रंप प्रशासन H-1B और L-1 वीजा से जुड़ी एक पुरानी नीति खत्म करने की तैयारी में है। इससे पहले मंजूर हो चुके वीजा की अवधि बढ़वाने के लिए भी दोबारा जांच का सामना करना पड़ सकता है। जानें प्रस्तावित बदलाव और भारतीय कर्मचारियों पर इसके संभावित असर के बारे में।

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2017 में नियम हटने के बाद H-1B वीजा एक्सटेंशन की रिजेक्शन दर 24 प्रतिशत और L-1B की 35 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
2017 में नियम हटने के बाद H-1B वीजा एक्सटेंशन की रिजेक्शन दर 24 प्रतिशत और L-1B की 35 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

In Short

  • अमेरिका में H-1B और L-1 वीजा रिन्यूअल के नियम बदलने की तैयारी, पुराने अप्रूवल की दोबारा हो सकती है जांच।
  • वित्त वर्ष 2025 में भारतीयों से जुड़े 2.26 लाख H-1B आवेदन मंजूर, नए प्रस्ताव से बढ़ सकती है परेशानी।
  • नियम लागू होने पर वीजा रिन्यूअल में देरी और आवेदन खारिज होने का खतरा बढ़ने की आशंका।

अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। अमेरिकी सरकार H-1B और L-1 जैसे वर्क वीजा के नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत वीजा की अवधि बढ़वाने यानी रिन्यूअल के समय पुराने अप्रूवल को पहले जैसा महत्व नहीं दिया जाएगा। इसका मतलब है कि जिन लोगों का वीजा पहले मंजूर हो चुका है, उनके आवेदन की भी दोबारा पूरी जांच हो सकती है।

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इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा का इस्तेमाल करने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है।

क्या है नया नियम और क्यों बढ़ेगी परेशानी?

अभी अमेरिका में 'प्रायर डिफरेंस' (Prior Deference) नाम की नीति लागू है। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की नौकरी और परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, तो वीजा की अवधि बढ़ाने के दौरान पुराने अप्रूवल को महत्व दिया जाता है।

लेकिन अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) इस व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव लेकर आया है।

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इमिग्रेशन अधिकारी हर वीजा एक्सटेंशन आवेदन की नए सिरे से जांच कर सकेंगे। इससे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने, आवेदन की प्रक्रिया लंबी होने और वीजा खारिज होने का खतरा बढ़ सकता है।

2.26 लाख भारतीयों से जुड़ा है मामला

अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में भारत में जन्मे लोगों के लिए नौकरी जारी रखने से जुड़े करीब 2.26 लाख H-1B आवेदन मंजूर हुए थे।

यह इस श्रेणी में मंजूर कुल आवेदनों का 77.6 प्रतिशत है। वहीं, चीन के लिए 31,581 आवेदन मंजूर हुए, जो कुल का 10.8 प्रतिशत है।

हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि सभी 2.26 लाख भारतीयों के वीजा पर तुरंत खतरा है।

पहले भी बदले थे नियम, बढ़ गई थीं मुश्किलें

अमेरिका में यह नीति पहली बार 2004 में शुरू हुई थी। साल 2017 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इसे हटा दिया गया था।

उस दौर में H-1B वीजा एक्सटेंशन की अस्वीकृति दर करीब 24 प्रतिशत और L-1B की 35 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सामने आई थी।

बाद में बाइडेन प्रशासन ने 2024 के आखिर में इस नीति को दोबारा लागू कर नियमों में शामिल किया था।

भारतीय परिवारों पर क्या होगा असर?

अगर नए नियम लागू होते हैं, तो अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों के साथ उनके परिवारों की परेशानी भी बढ़ सकती है।

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वीजा एक्सटेंशन खारिज होने और कोई दूसरा वैध इमिग्रेशन स्टेटस नहीं होने पर नौकरी छोड़ने या अमेरिका से वापस लौटने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। अमेरिकी सरकार ने इस पर लोगों से सुझाव मांगे हैं। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वीजा रिन्यूअल की प्रक्रिया में कितना बदलाव होगा।