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GST Council Meeting: छोटे कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को राहत! सरकार ने किए ये अहम ऐलान

57वीं GST काउंसिल की बैठक में छोटे कारोबारियों और ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। अब दूसरे सप्लायर की गलती का नुकसान उठाने से बचाने की तैयारी है। साथ ही ऑनलाइन सेलर्स, GST रिफंड और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।

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In Short

  • दूसरे सप्लायर की गलती से ईमानदार टैक्सपेयर्स का ITC नहीं रोकने की तैयारी।
  • छोटे ऑनलाइन सेलर्स दूसरे राज्यों में अलग कारोबारी जगह बनाए बिना सामान बेच सकेंगे।
  • GST रिफंड, रजिस्ट्रेशन और जुर्माने के नियमों में बदलाव से कारोबारियों को मिलेगी राहत।

57वीं GST काउंसिल की बैठक में छोटे कारोबारियों और ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बताया कि सरकार ऐसे टैक्सपेयर्स को नुकसान से बचाने की तैयारी कर रही है, जिनका इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) सप्लाई चेन में किसी दूसरे सप्लायर की गलती के कारण रोक दिया जाता है। इसके अलावा ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी नियम आसान बनाने का फैसला किया गया है।

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दूसरे सप्लायर की गलती का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा

वित्त मंत्री ने बताया कि बैठक में CGST एक्ट की धारा 162C में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया। इसका मकसद उन ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देना है, जिन्होंने सभी नियमों का पालन किया है।

अभी सप्लाई चेन में किसी सप्लायर के टैक्स जमा नहीं करने या फर्जी ITC पास करने के आरोप के कारण अंतिम खरीदार का टैक्स क्रेडिट भी रोका या वापस लिया जा सकता है। प्रस्तावित बदलाव से ऐसे टैक्सपेयर्स को सुरक्षा मिलेगी।

इसके लिए अधिकारियों की एक कमेटी भी बनाई जाएगी, जो उन खरीदारों को राहत देने के उपायों की जांच करेगी जिनके पास सही इनवॉइस है, सामान मिल चुका है और सप्लायर को पूरा भुगतान किया गया है।

ऑनलाइन सामान बेचने वालों को बड़ी राहत

GST काउंसिल ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए भी नियम आसान करने की घोषणा की है।

अब छोटे सेलर्स दूसरे राज्य में अलग कारोबार की जगह बनाए बिना वहां सामान बेच सकेंगे। इसके लिए वे ई-कॉमर्स कंपनी के वेयरहाउस को उस राज्य में अपना मुख्य कारोबारी पता घोषित कर सकेंगे।
 

हालांकि, इसके लिए प्लेटफॉर्म की सहमति जरूरी होगी, जो सिस्टम के जरिए अपने आप मिलेगी। सेलर का कम से कम एक राज्य में फिजिकल कारोबार होना जरूरी रहेगा।

GST रिफंड और रजिस्ट्रेशन होंगे तेज

काउंसिल ने रिफंड क्लेम के एक्नॉलेजमेंट की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का फैसला किया है। तय समय में कोई जवाब नहीं मिलने पर क्लेम स्वीकार माना जाएगा।

वहीं, जोखिम के आकलन के आधार पर 90% रिफंड क्लेम सिस्टम से मंजूर होंगे और तीन वर्किंग डेज में आदेश जारी किया जाएगा।

कम जोखिम वाले आवेदकों को बिना अधिकारी की दखल के तीन वर्किंग डेज में GST रजिस्ट्रेशन मिल सकेगा।

छोटे टैक्सपेयर्स के लिए आसान होंगे नियम

काउंसिल ने ₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले उन कारोबारियों के लिए वैकल्पिक स्कीम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जो सीधे ग्राहकों को सामान बेचते हैं।

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इसके तहत कारोबारी साल में एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे, जबकि टैक्स का भुगतान हर तीन महीने में करना होगा।

GST के जुर्माने और कार्रवाई में भी राहत

बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने, मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने और सामान्य जुर्माना ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 करने की घोषणा भी हुई।

इसके अलावा कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्री के बाहर पाइपलाइन और कुछ अन्य खर्चों पर ITC उपलब्ध कराने की बात कही गई।

काउंसिल ने साफ किया कि GST दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब दरों की समीक्षा साल में एक बार अलग बैठक में की जाएगी।