डीपफेक पर अब सरकार की और सख्ती, अश्विनी वैष्णव ने दिए ये संकेत
भारत सरकार अब AI के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी में है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ा ऐलान किया है। डीपफेक, साइबर सुरक्षा और AI से होने वाले नुकसान पर सरकार की खास नजर है। जानिए नए नियमों से क्या बदल सकता है और कंपनियों की जिम्मेदारी कितनी बढ़ेगी।

In Short
- सरकार अगले एक महीने में AI रेगुलेशन पर कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी।
- डीपफेक, साइबर सुरक्षा और AI से होने वाले मानसिक नुकसान पर रहेगा फोकस।
- AI से जुड़े जोखिमों की मुख्य जिम्मेदारी टेक कंपनियों को उठानी होगी।
भारत सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर नए नियम बनाने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार अगले एक महीने के भीतर AI रेगुलेशन पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी। इसमें AI से जुड़ी सुरक्षा, डीपफेक, साइबर खतरे और लोगों पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।
विश्व विकास रिपोर्ट (World Development Report) जारी होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अब AI को रेगुलेट करने का समय आ गया है। सरकार इस कंसल्टेशन पेपर के आधार पर आगे के नियम तय करेगी।
AI के इस्तेमाल में सुरक्षा सबसे जरूरी
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि AI से जुड़े नियमों में सबसे ज्यादा प्राथमिकता सुरक्षा को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसा सिस्टम बनाना चाहती है, जिसमें तकनीक के विकास के साथ लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
इसके अलावा AI से जुड़े बदलावों के बीच लोगों को नई स्किल सिखाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि समाज का कोई भी वर्ग पीछे न रह जाए।
डीपफेक को लेकर सरकार की बढ़ी चिंता
केंद्रीय मंत्री ने डीपफेक को समाज के लिए बड़ी परेशानी बताया। उन्होंने कहा कि डीपफेक वीडियो और तस्वीरों की क्वालिटी लगातार बेहतर हो रही है, जिससे लोगों के लिए असली और नकली कंटेंट में फर्क करना मुश्किल हो रहा है।
उनके मुताबिक, ऐसे कंटेंट से लोगों को गुमराह किया जा सकता है। इससे गलत धारणाएं बन सकती हैं और समाज में नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
AI का मानसिक स्वास्थ्य पर असर भी चिंता का विषय
सरकार AI के इस्तेमाल से होने वाले मानसिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पर भी ध्यान देगी। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां AI के इस्तेमाल का लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक में बदलाव के दौरान इंसान और उसकी भलाई सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
AI कंपनियों को उठानी होगी जिम्मेदारी
अश्विनी वैष्णव ने साफ किया कि AI से जुड़ी समस्याओं की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं होगी। साइबर सुरक्षा, डीपफेक, यूजर्स को होने वाले नुकसान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों की मुख्य जिम्मेदारी टेक्नोलॉजी कंपनियों को उठानी होगी।
सरकार का मानना है कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है। इसके लिए तकनीकी और कानूनी समाधान के साथ सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी जरूरी होगी।
AI के लिए अलग कानून बनाने की तैयारी
पहले सरकार का कहना था कि AI से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त हैं। हालांकि, अब सरकार अलग AI कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अप्रैल में सरकार ने YouTube, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म पर AI से बने कंटेंट की लगातार लेबलिंग का प्रस्ताव रखा था।
इसके अलावा आईटी मंत्रालय AI से बने नकली कंटेंट के लिए सहमति आधारित नियम, एजेंटिक AI की स्वायत्तता पर संभावित सीमाएं और ज्यादा जोखिम वाले AI एप्लिकेशन के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।
एजेंटिक AI ऐसे सिस्टम होते हैं, जो इंसानों की कम निगरानी में कई चरणों वाले काम की योजना बना सकते हैं और बाहरी टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। सरकार अगले एक महीने में कंसल्टेशन पेपर जारी करने के बाद उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे के नियम तय करेगी।

