₹10,000 से शुरू हुआ मशरूम बिजनेस बना ₹3 करोड़ का कारोबार; पंजाब के दो भाइयों ने ऐसे बदली खेती की तस्वीर
पंजाब के दो भाइयों ने ₹10,000 और 10 क्विंटल धान की पराली से शुरू किया मशरूम का काम आज ₹3 करोड़ से ज्यादा के सालाना कारोबार में बदल चुका है। संजीव सिंह और राजिंदर सिंह ने खेती के साथ स्पॉन उत्पादन लैब, पैकिंग और ट्रेनिंग जोड़कर एक सफल एग्री बिजनेस मॉडल तैयार किया।

In Short
- ₹10,000 और 10 क्विंटल धान की पराली से शुरू हुआ मशरूम बिजनेस अब ₹3 करोड़ से ज्यादा के सालाना टर्नओवर तक पहुंचा।
- परिवार की यूनिट हर दिन करीब 500 किलो ताजा मशरूम और 500 किलो मशरूम स्पॉन का उत्पादन करती है।
- खुद की लैब, आधुनिक खेती तकनीक और किसानों को ट्रेनिंग देकर भाइयों ने बनाया सफल एग्री बिजनेस मॉडल।
पंजाब के दो भाइयों ने सिर्फ ₹10,000 और 10 क्विंटल धान की पराली से ऐसा बिजनेस शुरू किया जिसने आज करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया है। 1995 में शुरू हुआ उनका मशरूम बिजनेस अब एक बड़े एग्री एंटरप्राइज में बदल चुका है, जहां खेती के साथ उत्पादन, पैकिंग, मार्केटिंग और ट्रेनिंग का काम भी होता है। इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत और सही रणनीति रही है, जिसने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
₹10,000 के निवेश से ₹3 करोड़ तक पहुंचा कारोबार
दसुया के बुढ़ीपिंड गांव के रहने वाले सरदार संजीव सिंह और उनके भाई राजिंदर सिंह ने साल 1995 में मशरूम की खेती शुरू की थी। करीब तीन दशक बाद उनका यह काम लगभग 1.5 एकड़ जमीन में फैला हुआ है और इसमें करीब 32 लोग काम करते हैं।अब उनका बिजनेस मशरूम उत्पादन के साथ मशरूम स्पॉन यानी बीज बनाने, पैकिंग, मार्केटिंग और किसानों को ट्रेनिंग देने तक पहुंच चुका है।
हर दिन 500 किलो मशरूम और 500 किलो स्पॉन का उत्पादन
परिवार के अनुसार उनकी यूनिट में हर दिन करीब 500 किलो ताजा मशरूम और 500 किलो मशरूम स्पॉन तैयार होता है। इसकी कुल कीमत करीब ₹95,000 प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।
इस बिजनेस से सालाना टर्नओवर ₹3 करोड़ से ज्यादा है और खर्च निकालने के बाद करीब 15 प्रतिशत का मुनाफा बचता है। परिवार का कहना है कि यह आम खेती से होने वाली कमाई से 20 गुना से भी ज्यादा है।
4,000 क्विंटल धान की पराली से तैयार होता है मशरूम
संजीव सिंह ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए हर साल करीब 4,000 क्विंटल धान की पराली का इस्तेमाल किया जाता है। यही पराली उनके बिजनेस के लिए मुख्य कच्चा माल है।समय के साथ दोनों भाइयों ने अपने काम को बढ़ाया और खुद का मशरूम स्पॉन तैयार करना भी शुरू कर दिया। इससे बाहर से बीज खरीदने की निर्भरता कम हुई।
बेटे ने नौकरी छोड़कर संभाला पारिवारिक बिजनेस
संजीव सिंह के बेटे हरमनप्रीत सिंह ने बीबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत और न्यूजीलैंड में मशरूम खेती की ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने नौकरी करने के बजाय परिवार के बिजनेस से जुड़ने का फैसला किया।
उनके जुड़ने से बिजनेस में मैनेजमेंट और मार्केटिंग का तरीका ज्यादा व्यवस्थित हुआ। अब उनकी यूनिट में बटन मशरूम का उत्पादन होता है, जिसे नियंत्रित इनडोर माहौल में पूरे साल उगाया जाता है।उनके उत्पाद पंजाब के जालंधर समेत जम्मू और आसपास के इलाकों में डीलर्स के जरिए पहुंचते हैं।
अपनी लैब से कम हुई बाहर की निर्भरता
साल 2008 में परिवार ने खुद की मशरूम स्पॉन बनाने वाली लैब शुरू की थी। यह राज्य की पहली ऐसी लैब थी, जिसने उन्हें उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।स्पॉन तैयार करने के लिए ग्रोइंग मीडियम, तापमान, पीएच, नमी और स्टेरिलाइजेशन का खास ध्यान रखा जाता है। बाजार की स्थिति के हिसाब से मशरूम और स्पॉन की कीमत करीब ₹90 से ₹100 प्रति किलो तक रहती है।
कम जमीन में ज्यादा कमाई का मॉडल
परिवार के पास करीब 17 एकड़ जमीन है। इसमें से लगभग 1.5 एकड़ जमीन मशरूम बिजनेस और उससे जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल होती है, जबकि बाकी जमीन पर गेहूं, आलू और धान की खेती होती है।
परिवार के अनुसार पारंपरिक खेती में कमाई बढ़ाने की संभावना सीमित थी, लेकिन मशरूम खेती ने कम जमीन में ज्यादा आय का रास्ता बनाया और रोजगार के अवसर भी पैदा किए।
किसानों को भी दे रहे हैं मशरूम खेती की ट्रेनिंग
इस बिजनेस को साल 2008 और 2015 में राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिले। इसके अलावा साल 2021 में उन्हें रत्न-ए-बागवानी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।परिवार अब दूसरे किसानों को भी मशरूम खेती की ट्रेनिंग देता है। इसमें ग्रोइंग मीडियम तैयार करना, स्टेरिलाइजेशन, स्पॉन उत्पादन, तापमान नियंत्रण, कटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और मार्केटिंग की जानकारी दी जाती है।

