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गैस सिलेंडर से लेकर हवाई सफर तक असर! LPG और ATF के बढ़े दाम, आज से लागू हुई नई कीमतें

इंडियन ऑयल ने 1 सितंबर से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में नई कीमतें लागू हो गई हैं। इसके साथ विमान ईंधन यानी ATF भी महंगा हुआ है। हालांकि, घरेलू LPG ग्राहकों के लिए फिलहाल राहत बरकरार है।

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In Short

  • IOC ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की। दिल्ली में सिलेंडर 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये का हो गया।
  • IOC ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की। दिल्ली में सिलेंडर 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये का हो गया।
  • 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने मंगलवार से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में इसकी कीमत करीब 9.50 रुपये बढ़कर 2,747.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। नई दरें 1 सितंबर से लागू हो गई हैं।

कई शहरों में बढ़े कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम

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नई कीमतों के बाद मुंबई में 19 किलो LPG सिलेंडर 2,701 रुपये का हो गया है, जबकि चेन्नई में इसकी कीमत 2,916.50 रुपये पहुंच गई है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कोलकाता में हुई, जहां सिलेंडर के दाम 11.50 रुपये बढ़ाकर 2,884 रुपये कर दिए गए।

तिरुवनंतपुरम और बेंगलुरु में भी कीमतों में 10-10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब वहां 19 किलो सिलेंडर क्रमश: 2,784 रुपये और 2,831 रुपये में मिलेगा। भुवनेश्वर और हैदराबाद में LPG सिलेंडर 11 रुपये महंगा होकर क्रमश: 2,919 रुपये और 2,996 रुपये हो गया है। पटना में कीमत बढ़कर 3,029 रुपये पहुंच गई है। हालांकि, घरेलू ग्राहकों को राहत मिली है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। 

ATF प्राइस में इतनी बढ़ोतरी

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। IOC सूत्रों के मुताबिक, घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF का दाम 6.28 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 121.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जो पहले 115 रुपये प्रति लीटर था। इसके अलावा 5 किलो वाले FTL नॉन-डोमेस्टिक LPG रिफिल की कीमत भी 2 रुपये बढ़कर 764 रुपये हो गई है।

वेस्ट एशिया संकट के बीच सप्लाई संभालने में जुटी IOC

LPG कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब IOC पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की लागत और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। कंपनी ने बताया कि उसने संकट के बीच LPG उत्पादन करीब 30 फीसदी बढ़ाया और अपनी रिफाइनरियों को 100 फीसदी से अधिक क्षमता पर चलाया। IOC के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने सोमवार को कंपनी की 67वीं वार्षिक आम बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार पर दबाव के बावजूद कंपनी ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने को प्राथमिकता दी।

साहनी ने कहा, “इस अभूतपूर्व संकट के दौरान इंडियनऑयल की प्राथमिकता साफ रही- सीमित विकल्पों और अस्थिर वैश्विक बाजारों के बीच ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना।” उन्होंने बताया कि कंपनी ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में बदलाव किया, रिफाइनरी संचालन को दोबारा व्यवस्थित किया और सप्लाई चेन को मजबूत किया। कंपनी ने 24 घंटे कंट्रोल रूम, रोजाना समीक्षा और रियल टाइम मार्केट मॉनिटरिंग के जरिए आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखी।

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रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ विस्तार की तैयारी

IOC ने वित्त वर्ष 2025-26 में 36,802 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ दर्ज किया। कंपनी का कारोबार करीब 8.86 लाख करोड़ रुपये रहा और पेट्रोलियम उत्पादों, प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल्स की कुल बिक्री 105 मिलियन टन से ज्यादा रही। कंपनी की रिफाइनरियों ने इस दौरान रिकॉर्ड 75.45 मिलियन टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया। वहीं, लिक्विड पाइपलाइन के जरिए परिवहन 102.52 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री 88.97 मिलियन टन रही।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। IOC ने 19.17 मिलियन टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया, जो 109.4 फीसदी क्षमता उपयोग के बराबर है। इस दौरान पाइपलाइन थ्रूपुट 28.55 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहा। साहनी ने कहा, “पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की ऊंची लागत से तिमाही मुनाफे पर दबाव रहा, लेकिन परिचालन प्रदर्शन कंपनी की मजबूती को दिखाता है।”

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रिफाइनिंग से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों पर फोकस

IOC पनिपत, गुजरात और बरौनी रिफाइनरी विस्तार परियोजनाओं के जरिए अपनी रिफाइनिंग क्षमता 80.75 मिलियन टन सालाना से बढ़ाकर करीब 98 मिलियन टन करने की तैयारी कर रही है। कंपनी पेट्रोकेमिकल्स, प्राकृतिक गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। पनिपत में बड़े स्तर के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का निर्माण शुरू हो चुका है

IOC की योजना 2030 तक पेट्रोकेमिकल उत्पादन की हिस्सेदारी बढ़ाने और प्राकृतिक गैस बिक्री में 1.5 गुना वृद्धि करने की है। कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी इकाई टेरा क्लीन 1 गीगावाट क्षमता विकसित कर रही है, जबकि 4.3 गीगावाट क्षमता की अन्य परियोजनाएं तैयारी में हैं। साहनी ने कहा, “लचीलापन संकट आने से पहले तैयार करना होता है। अनिश्चित दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा सिर्फ बड़े पैमाने पर नहीं, बल्कि तेजी से बदलाव, विविधता और तैयारी पर भी निर्भर करती है।”