BT India@100 में अमिताभ कांत का बड़ा बयान! भारत को मैन्युफैक्चरिंग में चीन से आगे निकलने पर देना होगा जोर
अमिताभ कांत ने BT India@100 में भारतीय उद्योग को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भारत को किन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ना होगा और चीन से मुकाबले के लिए कंपनियों को क्या बदलाव करने होंगे। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर।

BT India@100 में पूर्व G20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने भारतीय उद्योग को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को प्रोटेक्शनिज्म पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्वालिटी और वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक अब समय आ गया है कि भारत चीन के साथ मुकाबला करे और उसे उसी के खेल में पीछे छोड़े।
भारतीय कंपनियों को क्वालिटी और एक्सपोर्ट पर देना होगा जोर
Business Today India@100 के सेशन ‘द फ्यूचर ऑफ मेक इन इंडिया’ में अमिताभ कांत ने कहा कि भारतीय इंडस्ट्री को प्रोटेक्शनिज्म को भूलकर ज्यादा कंपीटिटिव बनने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंपनियों को क्वालिटी, वैल्यू और एक्सपोर्ट पर फोकस करना होगा, क्योंकि बिना अच्छी क्वालिटी और बेहतर वैल्यू के ग्लोबल मार्केट में सफलता हासिल करना मुश्किल है।
उन्होंने भारतीय कंपनियों से कहा कि उन्हें अपनी प्रोडक्शन क्षमता की तुलना चीन की कंपनियों से करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया।
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने का मौका
अमिताभ कांत ने कहा कि भारत को अब बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन टेक्नोलॉजी और भविष्य की टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब भारत के पास चीन को उसकी ही चुनौती में हराने का मौका है।
उन्होंने कहा कि चीन की इकोनॉमी धीमी होगी और यह भारत के लिए अपनी ग्रोथ तेज करने का सही समय है। उनके मुताबिक भारत को इस मौके का फायदा उठाकर अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना चाहिए।
बदल रही है दुनिया की इकोनॉमी और ग्लोबल सप्लाई चेन
अमिताभ कांत ने कहा कि दुनिया अब पहले जैसी नहीं रही है। उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बना ग्लोबल सिस्टम अब बदल रहा है। मल्टीलेटरलिज्म, यूनाइटेड नेशंस और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन का दौर कमजोर हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया में यूरोप और वेस्ट एशिया में संघर्ष बढ़ रहे हैं। ग्लोबल वैल्यू और सप्लाई चेन की जगह अब प्रोटेक्शनिज्म, इंडस्ट्रियल पॉलिसी और टैरिफ जैसी नीतियां ज्यादा दिखाई दे रही हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण दुनिया में प्रोडक्टिविटी बढ़ने का सबसे बड़ा दौर भी आने वाला है।
ट्रेड डील के बाद भारतीय कंपनियों के सामने नई चुनौती
अमिताभ कांत ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ ट्रेड डील करके अच्छा काम किया है। लेकिन अब यह इंडस्ट्री के लिए सीखने का समय है। अगर भारतीय कंपनियां खुद को कंपीटिटिव नहीं बनाएंगी तो विदेशी बाजारों से आने वाले प्रोडक्ट भारत में अपनी जगह बना लेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत के पास मौका है कि वह इन 55 बाजारों में अपने प्रोडक्ट पहुंचाए। लेकिन अगर कंपनियां अपनी क्षमता नहीं बढ़ाती हैं तो उन्हें भारतीय बाजार में भी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

