'यात्रियों के पास ज्यादा ऑप्शन होंगे': एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने के प्रस्ताव पर बोले Akasa CEO
भारत के एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति देने पर चर्चा कर रही है। Akasa Air ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जबकि कुछ एयरलाइंस का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा और स्लॉट बंटवारे को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- Akasa Air के CEO विनय दुबे ने एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया।
- फिलहाल दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते।
भारत में जल्द ऐसा हो सकता है कि एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियां अपनी एयरलाइन भी शुरू कर सकें। नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। नियम बदले तो एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है। Akasa Air के फाउंडर और CEO विनय दुबे ने इस कदम का समर्थन किया है।
यात्रियों को मिल सकते हैं ज्यादा ऑप्शन
PTI को दिए इंटरव्यू में विनय दुबे ने कहा कि भारत के एविएशन बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा और यात्रियों के लिए ज्यादा विकल्पों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट और एयरलाइन का मालिक एक ही निजी कंपनी होने पर कुछ सवाल जरूर उठ सकते हैं, लेकिन सरकार इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही फैसला करेगी।
दुबे ने कहा कि वह इस कदम से खुश हैं और इसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, सबसे अहम बात यह है कि देश में हवाई यात्रियों को ज्यादा एयरलाइंस और बेहतर विकल्प मिलने चाहिए।
अभी क्या हैं नियम?
फिलहाल दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते हैं। अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय ऐसे नियमों में ढील देने की संभावना पर चर्चा कर रहा है।
नियम बदलने के लिए कानून मंत्रालय की कानूनी मंजूरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है, तो Adani Group और GMR Airports Ltd जैसे समूहों के लिए एयरलाइन कारोबार में उतरने का रास्ता खुल सकता है।
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Adani Group मुंबई एयरपोर्ट के अलावा सात अन्य एयरपोर्ट चलाता है। वहीं, GMR दिल्ली एयरपोर्ट और देश में चार अन्य एयरपोर्ट का संचालन करता है।
प्रस्ताव का विरोध क्यों हो रहा है?
सरकार के इस प्रस्ताव का मकसद एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है। फिलहाल IndiGo और Air India की घरेलू क्षमता में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
हालांकि, कुछ एयरलाइंस को डर है कि एयरपोर्ट ऑपरेटर अपनी एयरलाइन को स्लॉट देने में फायदा पहुंचा सकते हैं। IndiGo के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने 23 जुलाई को कहा था कि एयरपोर्ट ऑपरेटर को एयरलाइन चलाने की अनुमति देने से हितों का बड़ा टकराव पैदा होगा।
इसके एक दिन बाद Adani Group ने उन मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार की अटकलों को खारिज कर दिया था, जिनमें कंपनी के एयरलाइन कारोबार में उतरने की बात कही गई थी।
भारतीय एविएशन बाजार पर क्या होगा असर?
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू एविएशन बाजारों में शामिल है। हालांकि, पिछले एक दशक में एयरलाइंस की संख्या कम हुई है। Jet Airways और Go First बंद हो चुकी हैं। Vistara और AirAsia India का Tata Group के तहत विलय हो चुका है।
इस वजह से IndiGo और Air India की बाजार में पकड़ और मजबूत हो गई है। Akasa Air के पास अभी 40 Boeing 737 विमान हैं और शुक्रवार को उसके चार साल पूरे हो जाएंगे। नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने 3 अगस्त को राज्यसभा में कहा था कि सरकार पुरानी एयरलाइंस को बढ़ने और नई एयरलाइंस को शुरू होने में मदद करेगी।

