Maruti Suzuki का ग्रीन कदम, हरियाणा प्लांट में शुरू हुआ 300 kW ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट
Maruti Suzuki ने हरियाणा के मानेसर प्लांट में अपना पहला ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट शुरू किया है। कंपनी अतिरिक्त सोलर पावर से हाइड्रोजन बनाएगी और इसे मैन्युफैक्चरिंग में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करेगी। यह कदम कंपनी की क्लीन एनर्जी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह कार्बन उत्सर्जन कम करने की तैयारी कर रही है।

In Short
- कंपनी FY2030-31 तक कार्बन उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
- सोलर पावर से बनेगा हाइड्रोजन और मैन्युफैक्चरिंग में होगा इस्तेमाल।
- Maruti Suzuki ने मानेसर में 300 kW ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट शुरू किया।
मारुति सुजुकी इंडिया ने हरियाणा के मानेसर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में अपना पहला 300 kW ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट शुरू किया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के जरिए कंपनी मैन्युफैक्चरिंग में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
कंपनी के मुताबिक, इस प्लांट में फैक्ट्री में पैदा होने वाली अतिरिक्त सोलर पावर का इस्तेमाल ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए किया जाएगा। छुट्टियों के दौरान बनने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा, जो आमतौर पर इस्तेमाल नहीं हो पाती, उससे इलेक्ट्रोलाइजर चलाया जाएगा।
मैन्युफैक्चरिंग में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होगा हाइड्रोजन
मारुति सुजुकी के अनुसार, इलेक्ट्रोलाइजर से तैयार ग्रीन हाइड्रोजन को स्टोर किया जाएगा और बाद में मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस हाइड्रोजन को नेचुरल गैस के साथ मिलाकर प्रोसेस फ्यूल के रूप में उपयोग किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट से मिलने वाले अनुभव के आधार पर वह हरियाणा और गुजरात के अन्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में भी ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को बढ़ाने की योजना बना रही है।
मारुति सुजुकी का यह प्रोजेक्ट कंपनी की कार्बन उत्सर्जन कम करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। कंपनी का मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग कार्बन फुटप्रिंट करीब 6.15 लाख टन है, जिसे FY2030-31 तक घटाकर 2.66 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है।
सोलर पावर से लेकर बायोगैस तक बढ़ा रही कंपनी का फोकस
मारुति सुजुकी के MD और CEO हिसाशी टेकुची ने कहा कि भविष्य में भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता सिर्फ लागत और गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन की मात्रा पर भी निर्भर करेगी।
कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन के अलावा सोलर पावर, बायोगैस और बैटरी एनर्जी स्टोरेज जैसी क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है।
मारुति के खारखोदा प्लांट में 10 टन प्रति दिन क्षमता वाले बायोगैस प्लांट की तैयारी चल रही है, जिसे FY2026-27 में शुरू किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी ने वहां 1 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी शुरू किया है।
कंपनी ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को भी मैन्युफैक्चरिंग ईंधन के तौर पर शामिल करना शुरू किया है। इसके लिए बोर्ड ने चार CBG प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनके लिए कुल 561 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

