scorecardresearch

2022 या उससे पहले खरीदे गए वाहनों पर E20 पेट्रोल की मार! माइलेज गिरा, इंजन खराबी से बढ़ी टेंशन

LocalCircles के सर्वे के हवाले से बताया कि हर 2 में से 1 पेट्रोल वाहन मालिक ने माना कि पिछले 9 महीनों में उनकी गाड़ी का माइलेज कम हुआ है। यह सर्वे उन लोगों पर किया गया था जिनके पास 2022 या उससे पहले के मॉडल वाले पेट्रोल वाहन हैं।

Advertisement
AI Generated Image

E20 Petrol: भारत में E20 पेट्रोल की बिक्री शुरू होने के बाद से ही लोग माइलेज घटने की शिकायत कर रहे थें। अब ताजा सर्वें ने इस बात की और पुष्ट की है। एक नए सर्वे में यह बात सामने आई है कि 2022 या उससे पहले खरीदे गए पेट्रोल वाहन चलाने वाले बड़ी संख्या में लोग माइलेज घटने और इंजन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

advertisement

सम्बंधित ख़बरें

बिजनेस टुडे ने LocalCircles के सर्वे के हवाले से बताया कि हर 2 में से 1 पेट्रोल वाहन मालिक ने माना कि पिछले 9 महीनों में उनकी गाड़ी का माइलेज कम हुआ है। यह सर्वे उन लोगों पर किया गया था जिनके पास 2022 या उससे पहले के मॉडल वाले पेट्रोल वाहन हैं।

E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों में आ रही दिक्कत

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ माइलेज कम होना नहीं बल्कि  इंजन और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी परेशानियों भी सामने आ रही हैं। सर्वे में शामिल 29% वाहन मालिकों ने बताया कि उन्हें इंजन, फ्यूल लाइन, टैंक, कार्बोरेटर और अन्य हिस्सों में असामान्य घिसावट (Abnormal Wear) और मरम्मत की जरूरत महसूस हुई।

यह सर्वे देश के 301 जिलों में किया गया, जिसमें 50,000 से ज्यादा पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया। इनमें 45% लोग टियर-1 शहरों से, 29% टियर-2 शहरों से और 26% छोटे शहरों और कस्बों से थे।

माइलेज में 6% से ज्यादा की कमी

सरकारी अनुमान कहते हैं कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 1% से 6% तक की कमी आ सकती है। लेकिन कई वाहन मालिकों का दावा है कि असल जिंदगी में नुकसान इससे कहीं ज्यादा महसूस हो रहा है, खासकर पुराने वाहनों में जो रोजाना ट्रैफिक और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलते हैं।

मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह चिंता और बड़ी हो जाती है, क्योंकि पेट्रोल खर्च पहले ही लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माइलेज में थोड़ी सी गिरावट भी हर महीने के बजट पर सीधा असर डाल रही है।

प्रीमियम पेट्रोल मिडिल क्लास के बजट से बाहर

अब देश के ज्यादातर हिस्सों में E20 पेट्रोल ही डिफॉल्ट फ्यूल ग्रेड बन चुका है। पुराने वाहन मालिकों के पास दूसरे विकल्प भी बहुत कम बचे हैं। कुछ कंपनियां कम एथेनॉल वाला प्रीमियम पेट्रोल बेच रही हैं, लेकिन उसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि आम लोगों के लिए उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना आसान नहीं है।

वाहन मालिकों ने जिन परेशानियों का सबसे ज्यादा जिक्र किया, उनमें इंजन का जल्दी गर्म होना, गाड़ी स्टार्ट करने में दिक्कत, खुरदरी आइडलिंग (Rough Idling), ज्यादा कंपन, पिकअप कम होना और माइलेज गिरना शामिल है। गर्मियों के दौरान इंजन ओवरहीटिंग की शिकायतें सोशल मीडिया पर भी तेजी से बढ़ी हैं।

advertisement

एथेनॉल वाले पेट्रोल से क्या-क्या परेशानी आ सकती है?

ऑटो इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल का केमिकल नेचर सामान्य पेट्रोल से अलग होता है। एथेनॉल नमी जल्दी खींचता है, उसमें ऊर्जा की मात्रा कम होती है और लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर यह पुराने वाहनों के रबर और प्लास्टिक के हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।

इससे फ्यूल लाइन खराब होना, सील और गैस्केट कमजोर पड़ना, इंजेक्टर डैमेज और इंजन पर अतिरिक्त दबाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पुराने दोपहिया वाहन, छोटी कारें और बजट कम्यूटर वाहन सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, क्योंकि इनके मालिकों के लिए बार-बार मरम्मत का खर्च उठाना आसान नहीं होता।