क्या आपकी हाउसिंग सोसाइटी भी ईवी चार्जर लगाने से मना कर रही है? जानें अपने अधिकार
देश के कई शहरों में ईवी मालिकों का कहना है कि उनकी हाउसिंग सोसाइटी या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) बेसमेंट पार्किंग में चार्जर लगाने की परमिशन देने में देरी कर रही है या साफ मना कर रही है। ज्यादातर सोसाइटी आग लगने के खतरे और अन्य सेफ्टी नियमों की कमी का हवाला दे रही हैं।

EV Charging in apartments: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बचने और एनवायरमेंट को ध्यान में रखते हुए ईवी वाहन खरीद रहे हैं। लेकिन अब बड़ी समस्या गाड़ियों की नहीं, बल्कि उन्हें चार्ज करने की जगह को लेकर सामने आ रही है। खासकर अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले लोगों को अपने ही घर में ईवी चार्जर लगाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
देश के कई शहरों में ईवी मालिकों का कहना है कि उनकी हाउसिंग सोसाइटी या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) बेसमेंट पार्किंग में चार्जर लगाने की परमिशन देने में देरी कर रही है या साफ मना कर रही है। ज्यादातर सोसाइटी आग लगने के खतरे और अन्य सेफ्टी नियमों की कमी का हवाला दे रही हैं।
ईवी पार्किंग के स्पष्ट नियम न होना बड़ी परेशानी
कानूनी तौर पर मामला इतना सीधा नहीं है। JSA एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के पार्टनर अनुपम वर्मा के मुताबिक, भारत में मौजूदा नियमों के तहत घरों के बेसमेंट पार्किंग एरिया में ईवी चार्जर लगाना पूरी तरह मना नहीं है। लेकिन इसके लिए कई सेफ्टी रुल्स और मंजूरियों का पालन करना जरूरी होता है।
ईवी मालिकों का क्या अधिकार है?
सबसे बड़ा सहारा केंद्र सरकार के पावर मंत्रालय की 2024 EV Charging Guidelines हैं। इन गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि लोग अपनी तय पार्किंग जगह पर पर्सनल ईवी चार्जर लगा सकते हैं। इसके लिए बिजली मौजूदा मीटर से भी ली जा सकती है या अलग सब-मीटर भी लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, सरकार ने हाउसिंग सोसाइटी को अपनी पार्किंग का कुछ हिस्सा ईवी चार्जिंग के लिए रिजर्व रखने की सलाह भी दी है।
लेकिन असली दिक्कत यहीं से शुरू होती है। क्योंकि बिजली, बिल्डिंग नियम और फायर सेफ्टी जैसे मामलों में केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है। यानी हर राज्य के अपने नियम हो सकते हैं। इसी वजह से ईवी चार्जर लगाने का प्रोसेस कई जगहों पर उलझ जाता है।
कई डिपार्टमेंट की परमिशन काम को बनाती है मुश्किल
आसान भाषा में समझें तो कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति सीधे जाकर चार्जर नहीं लगा सकता। इसके लिए स्थानीय बिजली कंपनी यानी DISCOM, हाउसिंग सोसाइटी और कई मामलों में फायर डिपार्टमेंट की मंजूरी भी लेनी पड़ती है। साथ ही इंस्टॉलेशन को Central Electricity Authority के 2023 सेफ्टी रूल्स और राज्य की बिजली सप्लाई कोड का पालन करना जरूरी होता है।
हाउसिंग सोसाइटी को भी कानून से ताकत मिलती है। सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले ‘नहलचंद लालूचंद केस’ में कहा गया था कि रजिस्ट्रेशन के बाद पार्किंग और कॉमन एरिया सोसाइटी की संपत्ति माने जाएंगे। इसलिए RWAs को पार्किंग एरिया में बदलाव को लेकर अधिकार मिल जाते हैं।
कुछ राज्यों की बेहतर पहल
हालांकि कुछ राज्यों ने EV मालिकों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। महाराष्ट्र इसका बड़ा उदाहरण है। वहां अगर सभी सुरक्षा नियम पूरे किए जाएं तो हाउसिंग सोसाइटी को सात दिन के अंदर NOC जारी करनी होती है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता आग लगने के खतरे को लेकर है। भारत और विदेशों में ईवी में आग लगने की कई घटनाओं के बाद प्रशासन ज्यादा एक्टिव हो गया है। अक्टूबर 2025 में Bureau of Indian Standards (BIS) ने National Building Code में बदलाव का प्रस्ताव दिया था, जिसमें बेसमेंट में ईवी और हाइब्रिड वाहनों की पार्किंग और चार्जिंग को सीमित करने की बात कही गई।
देश भर पर मजबूत नीति न होना बड़ी वजह
हरियाणा की बात करें तो वहां फायर डिपार्टमेंट ने बेसमेंट में ईवी चार्जिंग स्टेशन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसका असर गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों के हजारों अपार्टमेंट निवासियों पर पड़ा है। हालांकि बाद में हरियाणा सरकार ने Building Code में बदलाव का प्रस्ताव रखा ताकि ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा सके।
लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि EV मालिकों को टकराव की बजाय नियमों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। यानी DISCOM से मंजूरी लेना, सही लोड कैलकुलेशन करवाना, फायर सेफ्टी नियमों का पालन करना और अगर सोसाइटी परमिशन नहीं दे तो उसका लिखित जवाब लेना जरूरी है।

