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गोल्ड-सिल्वर बहुत दौड़े, अब कॉपर में आएगा उछाल! कमोडिटी मार्केट के नए 'किंग' की आहट, जानें क्या है वजह

रिपोर्ट के मुताबिक अब कमोडिटी बाजार में लीडरशिप की भूमिका कीमती मेटल्स से हटकर इंडस्ट्रियल मेटल्स की तरफ जा सकती है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा कॉपर को मिल सकता है।

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AI Generated Image

बीते कुछ सालों में गोल्ड और सिल्वर ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं लेकिन अब बाजार की नजर एक नई मेटल पर टिकती दिखाई दे रही है और वह है कॉपर (Copper). एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में कॉपर, कमोडिटी सुपर-साइकिल का अगला बड़ा स्टार बन सकता है।

बिजनेस टुडे ने HDFC Tru की नई रिपोर्ट Copper: The Next Leg of the Commodity Supercycle के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि अब कमोडिटी बाजार में लीडरशिप की भूमिका कीमती मेटल्स से हटकर इंडस्ट्रियल मेटल्स की तरफ जा सकती है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा कॉपर को मिल सकता है।

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गोल्ड-सिल्वर दौड़े, अब कॉपर की बारी?

रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में सोने की कीमतों में 60% से ज्यादा और चांदी में 140% से अधिक की तेजी देखने को मिली। वहीं इसी अवधि में कॉपर करीब 40% ही बढ़ा।

पहली नजर में यह कम लग सकता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यही बात कॉपर को दिलचस्प बनाती है। गोल्ड और सिल्वर पहले ही काफी ऊपर पहुंच चुके हैं, जबकि कॉपर अभी भी ऐतिहासिक रूप से दूसरे मेटल की तुलना में कम प्राइस पर कारोबार कर रहा है।

 

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कॉपर को लेकर इतना भरोसा क्यों?

रिपोर्ट में बताया गया है कि Copper-to-Gold Ratio यानी तांबा-से-सोना अनुपात फिलहाल कई दशकों के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। इतिहास बताता है कि जब भी यह रेश्यो इतना नीचे गया है, उसके बाद तांबे में मजबूत तेजी देखने को मिली है।

Copper-to-Silver Ratio भी इसी तरह के संकेत दे रहा है। इसका मतलब यह माना जा रहा है कि कमोडिटी रैली में तांबा अभी पीछे रह गया है और अब इसमें तेजी आने की संभावना बढ़ सकती है।

AI और इलेक्ट्रिक कारें बढ़ाएंगी मांग

पहले कमोडिटी की मांग मुख्य रूप से फैक्ट्री उत्पादन और आर्थिक विकास पर निर्भर होती थी। लेकिन अब कॉपर की कहानी अलग है। आज दुनिया तेजी से  एआई , डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है। इन सभी सेक्टर्स में कॉपर बेहद जरूरी मेटल माना जाता है।

बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के अनुसार आने वाले सालों में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर,डेटा सेंटर, पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन प्रोजेक्ट में कॉपर की मांग लगातार बढ़ने वाली है।

अनुमान है कि 2040 तक एआई डिफेंस और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे सेक्टर में कॉपर की मांग का लगभग 45% पहुंच सकती हैं। फिलहाल यह आंकड़ा करीब 32% है।

सप्लाई सबसे बड़ी चुनौती

जहां मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं कॉपर की सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रही। दुनिया में नए कॉपर भंडार की खोज अब मुश्किल होती जा रही है। इसके अलावा पिछले कई सालों में माइनिंग इन्वेस्टमेंट में भी गिरावट आई है।

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दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर प्रोड्यूसर देश चिली भी कई समस्याओं से जूझ रहा है। वहां पानी की कमी, ऑपरेशनल दिक्कतें और नए हाई-ग्रेड रिजर्व की कमी प्रोडक्शन को प्रभावित कर रही है।

प्रोडक्शन कोस्ट भी बढ़ रही

कॉपर निकालने में इस्तेमाल होने वाला सल्फ्यूरिक एसिड इस साल करीब 80% महंगा हो चुका है, जबकि साल-दर-साल इसकी कीमतों में 200% से ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। इससे माइनिंग कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और सप्लाई पर और दबाव आ सकता है।