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Jammu Kashmir के बाद राजस्थान में दूसरे लिथियम रिजर्व की खोज

राजस्थान के डेगाना (नागौर) में लिथियम भंडार की खोज की है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में लिथियम के रिज़र्व की खोज हुई थी,तीन महीने बाद अब राजस्थान में भी करीब 6 मिलियन टन लिथियम का भंडार मिला है।

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Rajasthan के डेगाना (नागौर) में लिथियम भंडार की खोज की है।
Rajasthan के डेगाना (नागौर) में लिथियम भंडार की खोज की है।

Rajasthan के डेगाना (नागौर) में लिथियम भंडार की खोज की है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में Lithium के रिज़र्व की खोज हुई थी जिसके तीन महीने बाद अब राजस्थान में भी करीब 6 मिलियन टन लिथियम का भंडार मिला है।  

लिथियम को अब सफेद सोना कहा जाता है।
Lithium अब सफेद सोना कहा जाता है।

लिथियम को अब सफेद सोना कहा जाता है। ये सफेद सोना अब इलेक्ट्रिक बैट्री बनाने के काम आ रहा है। भारत में 2030 तक 30% वाहनों को लिथियम बैट्री से चलाने की कवायद चल रही है। 

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इसके लिए भारत को भारी मात्रा में लिथियम की जरूरत होगी। राजस्थान में लिथियम के जो भंडार मिले हैं, वे डेगाना और उसके आसपास के क्षेत्र की उसी रेनवेट पहाड़ी में हैं, जहां से कभी टंगस्टन खनिज की आपूर्ति देश में की जाती थी।  लिथियम पहली बार 1999 में जम्मू और कश्मीर में खोजा गया था। लेकिन उस समय, लिथियम एक गैर-चमकदार धातु थी। लिथियम का उपयोग काफी कम था लेकिन लिथियम बैट्री ने पूरे खेल को बदलकर रख दिया।  

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इस समय चीन लिथियम का सबसे बड़ा हब है और चीन दुनिया की सबसे ज्यादा लिथियम बैट्री का निर्माण कर रहा है। भारत में जैसे-जैसे लिथियम बैट्री का उपयोग बढ़ेगा वैसे ही लिथियम की जरूरत पड़ेगी। एक तरफ तेल पर निर्भरता कम होगी तो दूसरी तरफ लिथियम पर निर्भरता बढ़ेगी। 

इस समय चीन लिथियम का सबसे बड़ा हब है।
Lithium का सबसे बड़ा हब चीन है।