अक्षय तृतीया को सोना खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन क्यों माना जाता है? ज्यादातर लोग नहीं जानते जवाब
अक्षय तृतीया भारत में समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन सोना खरीदने की परंपरा बेहद लोकप्रिय है, हालांकि इसके रिटर्न का त्योहार से सीधा संबंध नहीं होता। सोने की कीमतें वैश्विक कारकों पर निर्भर करती हैं, लेकिन इस दिन खरीदारी का महत्व सांस्कृतिक रूप से जुड़ा है।

Akshaya Tritiya 2026: भारत में अक्षय तृतीया आते ही ज्वेलरी दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगती है। सालों पुरानी परंपरा के चलते यह दिन अब देश में सोना खरीदने के सबसे बड़े मौकों में से एक बन चुका है। इस साल अक्षय तृतीया रविवार 19 अप्रैल को है।
क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया?
वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व हिंदू मान्यताओं में बेहद शुभ माना जाता है। इसे समृद्धि, सौभाग्य और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। कुछ परंपराओं में माना जाता है कि गंगा इसी दिन पृथ्वी पर अवतरित हुईं। वहीं महाभारत की कथा में पांडवों को 'अक्षय पात्र' मिलने का जिक्र है, जो कभी खाली नहीं होता था। इन सभी कहानियों ने इस विश्वास को मजबूत किया कि इस दिन शुरू किया गया काम लगातार बढ़ता है।
सोना खरीदने की परंपरा क्यों?
भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि सुरक्षा और संपत्ति का प्रतीक माना जाता है। इसे लंबे समय तक निवेश और पीढ़ियों तक संजोकर रखने की चीज के रूप में देखा जाता है।
अक्षय तृतीया का मतलब ही 'कभी न खत्म होने वाला' होता है, इसलिए इस दिन सोना खरीदना समृद्धि और स्थिरता लाने का प्रतीक माना जाता है।
कारोबार के लिए बड़ा मौका
समय के साथ यह परंपरा एक बड़े शॉपिंग सीजन में बदल गई है। ज्वेलरी ब्रांड्स इस मौके पर नए कलेक्शन और ऑफर्स लॉन्च करते हैं।
दीवाली और शादी के सीजन की तरह ही अक्षय तृतीया अब सोने की बिक्री के लिए सबसे अहम समय बन चुकी है, जहां डिमांड में तेज उछाल देखने को मिलता है।
क्या सच में इस दिन खरीदना फायदेमंद?
असल में सोने के रिटर्न का त्योहार से कोई सीधा संबंध नहीं होता। इसकी कीमत ग्लोबल डिमांड, महंगाई और करेंसी मूवमेंट जैसे फैक्टर्स से तय होती है। यही वजह है कि अगर कीमतें ज्यादा हों, तो लोग अक्षय तृतीया पर भी कम खरीदते हैं। वहीं कीमतें गिरने पर डिमांड बढ़ जाती है।

