Exclusive: अनिल अग्रवाल का बड़ा दांव! रेयर अर्थ मैग्नेट रेस में उतरेगी वेदांता, R&D के दम पर बड़ा प्लान तैयार
कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता इस स्कीम के लिए आवेदन करने की योजना बना रही है और इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता पर काम कर रही है।

In Short
- वेदांता ने रेयर अर्थ मैग्नेट सेक्टर में एंट्री की तैयारी शुरू की, सरकारी स्कीम के लिए आवेदन करेगी
- 7,280 करोड़ की सरकारी योजना से मिलेगा कैपेक्स सब्सिडी और इंसेंटिव का लाभ
- कंपनी R&D पर फोकस कर रही, रेयर अर्थ एक्सट्रैक्शन की तकनीक विकसित करने पर काम जारी
अरबपति अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड अब भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट बनाने की सरकारी योजना में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही है। कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता इस स्कीम के लिए आवेदन करने की योजना बना रही है और इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता पर काम कर रही है।
R&D पर फोकस, लंबी प्रक्रिया की तैयारी
अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता भारत की उन चुनिंदा कंपनियों में है जिनके पास रेयर अर्थ निकालने की तकनीक है। यह लंबी प्रक्रिया है। हम यह भी जांच रहे हैं कि क्या अपनी मौजूदा खदानों से रेयर अर्थ निकाले जा सकते हैं।
उन्होंने साफ किया कि भारत में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि उन्हें निकालने का तरीका क्या होगा। उन्होंने कहा कि या तो विदेशी कंपनियां करेंगी, या फिर पब्लिक सेक्टर जैसे चीन-रूस में होता है, या फिर उद्यमी आगे आएंगे।
सरकार की 7,280 करोड़ की बड़ी योजना
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी, जिसका मकसद देश में सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) का उत्पादन बढ़ाना है। इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
चुनी गई कंपनियों को 600 से 1,200 MTPA तक की उत्पादन क्षमता दी जाएगी। इसके साथ 750 करोड़ रुपये तक की कैपिटल सब्सिडी और 6,450 करोड़ रुपये का सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव भी मिलेगा।
ग्लोबल टेंडर
भारी उद्योग मंत्रालय ने इस योजना के तहत ग्लोबल टेंडर जारी किया है। कंपनियां 20 मार्च 2026 से दस्तावेज़ हासिल कर सकती हैं।
7 अप्रैल को प्री-बिड मीटिंग होगी, जबकि 28 मई तक बोली जमा करनी है। 29 मई को टेक्निकल बिड खोली जाएगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन CPP पोर्टल के जरिए दो चरणों-टेक्निकल और फाइनेंशियल में होगी।
ऑटो कंपनियां दूरी बना रहीं
मंत्रालय ने ऑटो और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों से भी संपर्क किया था, लेकिन गुरुग्राम की Uno Minda ने इस सेक्टर में न आने का फैसला किया है। इससे साफ है कि फिलहाल इस क्षेत्र में बड़े माइनिंग और मेटल प्लेयर्स की भूमिका ज्यादा अहम रहने वाली है।

