Toxic Movie Review: यश का डबल रोल, दमदार एक्शन और इमोशन, जानिए कैसी है गीतु मोहनदास की फिल्म
Yash की फिल्म Toxic एक आम गैंगस्टर कहानी से आगे बढ़कर प्यार, परिवार, वफादारी और बदले की कहानी दिखाती है। Geetu Mohandas के निर्देशन में बनी इस फिल्म में Yash डबल रोल में नजर आते हैं। फिल्म का बड़ा एक्शन और इमोशनल कहानी इसे खास बनाते हैं, लेकिन असली ट्विस्ट जानने के लिए आपको आगे पढ़ना होगा।

डायरेक्टर: Geetu Mohandas
कास्ट: Yash, Kiara Advani, Nayanthara, Huma Qureshi, Tara Sutaria, Rukmini Vasanth
अवधि: 3 घंटे 14 मिनट
रेटिंग: 3.5/5
Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups ऐसी फिल्म है जो शुरुआत के कुछ मिनटों में अपनी पूरी कहानी सामने नहीं रखती। फिल्म दर्शकों को धीरे-धीरे अपनी दुनिया में लेकर जाती है। कहानी में गैंगस्टर, बंदूकें और भरपूर एक्शन है, लेकिन इसके साथ परिवार, प्यार, वफादारी और खुद को सुधारने की चाह भी दिखाई गई है। डायरेक्टर Geetu Mohandas ने इन सभी पहलुओं को एक बड़े और अलग अंदाज में पेश किया है।
Toxic एक ऐसी गैंगस्टर फिल्म है जो सिर्फ गैंगस्टर और हिंसा तक सीमित नहीं रहती। इसमें प्यार, परिवार, वफादारी, बदला और redemption को भी जगह दी गई है। Yash की स्टार पावर, मजबूत सपोर्टिंग कास्ट और Geetu Mohandas की अलग कहानी इसे खास बनाती है। फिल्म का पैमाना बड़ा है और थिएटर में इसके बड़े एक्शन मोमेंट्स ज्यादा असरदार लग सकते हैं।
गोवा की पृष्ठभूमि में बनी कहानी
फिल्म की कहानी आजादी के बाद के गोवा में सेट है, जहां ताकत और जलन लोगों की जिंदगी बदल देती है। हिंसा इस दुनिया का हिस्सा है, लेकिन फिल्म का फोकस सिर्फ हिंसा पर नहीं है। कहानी दिखाती है कि प्यार इंसान को कमजोर कर सकता है, परिवार लड़ने की वजह बन सकता है और वफादारी की परीक्षा किसी भी रिश्ते को बदल सकती है। बदले की भावना भी किरदारों को ऐसी जगह पहुंचाती है, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना नहीं की थी।
Yash का डबल रोल
Yash फिल्म में Raya और Ticket नाम के दो अलग किरदार निभा रहे हैं। Raya पूरी तरह गैंगस्टर की दुनिया का हिस्सा है, जबकि Ticket कहानी में एक अलग इमोशनल रंग लेकर आता है। दोनों किरदारों का फर्क Yash को अपनी एक्टिंग दिखाने का अच्छा मौका देता है। शांत सीन्स में उनका असर नजर आता है, वहीं जब फिल्म उनसे फुल मास अवतार की मांग करती है तो वह उसमें भी पूरी तरह फिट बैठते हैं।
यहां देखें ट्रेलर
सपोर्टिंग कास्ट ने भी छोड़ी छाप
फिल्म में नयनतारा की गंगा मजबूत और इमोशनल किरदार है। कियारा आडवाणी की नादिया कहानी में नरमी और संवेदनशीलता लेकर आती हैं। हुमा कुरैशी की एलिजाबेथ का अपना मजबूत व्यक्तित्व है, जबकि रुक्मिणी वसंत ने मेलिसा के किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी है। तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डेरेल डिसिल्वा और सुदेव नायर के किरदार भी कहानी में अपनी जगह बनाए रखते हैं।
पहला हाफ धीमा लेकिन जरूरी
फिल्म का पहला हाफ थोड़ा धैर्य मांगता है, लेकिन बेवजह लंबा नहीं लगता। इसमें किरदारों के रिश्ते और उनके मकसद धीरे-धीरे सामने आते हैं। इंटरवल के करीब फिल्म एक बड़े मोड़ पर पहुंचती है, जो दर्शकों को दूसरे हाफ के लिए उत्सुक कर देता है।
दूसरे हाफ में बढ़ता है एक्शन
दूसरे हाफ में हिंसा और एक्शन दोनों काफी बढ़ जाते हैं। एक्शन सीक्वेंस बड़े और ज्यादा आक्रामक हैं। फिल्म की हिंसा काफी रॉ और ब्रूटल महसूस होती है, जो इसके गैंगस्टर वर्ल्ड के हिसाब से सही बैठती है। हालांकि, एक्शन के बीच प्यार और परिवार कहानी का इमोशनल सेंटर बने रहते हैं।
3 घंटे 14 मिनट की फिल्म
Toxic की अवधि 3 घंटे 14 मिनट है। फिल्म में कई किरदार, रिश्ते और कहानी की अलग-अलग परतें हैं, इसलिए इसे बड़े कैनवास पर बनाया गया महसूस होता है। क्लाइमैक्स में भी कहानी एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है और सिर्फ एक्शन के दम पर खत्म नहीं होती।

