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संजय कपूर की संपत्ति को लेकर विवाद: रानी कपूर और प्रिया सचदेव के बयानों की पड़ताल - डिटेल

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में अदालती रिकॉर्ड ने एक नया मोड़ ला दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे दो अलग-अलग सिविल मामलों में उनकी मां रानी कपूर ने बेटे के चरित्र और भूमिका को लेकर एक-दूसरे से उलट दावे किए हैं।

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Priya Sachdev, sunjay kapur
संजय कपूर और प्रिया सचदेव (Photo: Instagram/@priyaskapur)

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में अदालती रिकॉर्ड ने एक नया मोड़ ला दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे दो अलग-अलग सिविल मामलों में उनकी मां रानी कपूर ने बेटे के चरित्र और भूमिका को लेकर एक-दूसरे से उलट दावे किए हैं।

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जनवरी 2026 का मुकदमा: साजिश और दबाव के आरोप

जनवरी 2026 में दायर सिविल सूट में रानी कपूर ने याचिका में आरोप लगाया है कि उनके बेटे संजय कपूर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची।

दस्तावेजों के मुताबिक, उन्होंने बेटे पर अनुचित दबाव, धमकी और जबरदस्ती के जरिए संपत्तियों पर कंट्रोल हासिल करने का आरोप लगाया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि एक ट्रस्ट के जरिए संपत्तियां मोड़ी गईं और वरिष्ठ नागरिक होने की उनकी निर्भरता का फायदा उठाया गया। इस वर्जन में संजय कपूर को बेईमान और दबाव बनाने वाला बताया गया है।

सितंबर 2025 का मामला: बेटे की ईमानदारी पर भरोसा

इसके ठीक उलट, सितंबर 2025 में दायर एक अन्य सिविल केस में, जहां रानी कपूर प्रतिवादी नंबर 3 हैं, उनका रुख अलग है।
इस मामले में उन्होंने एक विवादित वसीयत को चुनौती देते हुए संजय कपूर की ईमानदारी, पारिवारिक लगाव और बारीकियों पर ध्यान देने की आदत को आधार बनाया। याचिका में कहा गया कि मां और बच्चों को वंचित करने वाली वसीयत उनके स्वभाव से मेल नहीं खाती।

विरोधाभास पर सवाल

कानूनी जानकारों का कहना है कि दोनों याचिकाओं में संजय कपूर की छवि पूरी तरह विपरीत है। एक में उन्हें साजिशकर्ता बताया गया है, तो दूसरे में ईमानदारी की मिसाल। ऐसे में एक दावे को मानने पर दूसरा कमजोर पड़ता है।

सार्वजनिक बयानों को लेकर नई शिकायत

विवाद यहीं नहीं रुका। संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर ने एक अलग शिकायत में आरोप लगाया है कि मंधिरा कपूर स्मिथ ने पॉडकास्ट और टीवी इंटरव्यू के जरिए उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए।

फिलहाल सभी मामले दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित हैं। अदालत ने अभी किसी भी आरोप या विरोधाभास पर फैसला नहीं दिया है।