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E20 फ्यूल पर रोक और NTA खत्म करने की मांग, वैज्ञानिकों ने सरकार से की बड़ी अपील

E20 फ्यूल पॉलिसी से लेकर परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा बजट तक, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के एक समूह ने सरकार के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं. मुंबई में जारी साझा अपील में रिसर्च फंडिंग, पर्यावरण और वैज्ञानिक सोच से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं.

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वैज्ञानिकों ने की E20 रोलआउट वापस लेने की मांग (Photo: ITG)
वैज्ञानिकों ने की E20 रोलआउट वापस लेने की मांग (Photo: ITG)

In Short

  • वैज्ञानिकों ने E20 फ्यूल के रोलआउट को रोकने और इसके पर्यावरणीय असर का विस्तृत आकलन कराने की मांग की.
  • NTA को खत्म कर परीक्षा व्यवस्था में बदलाव और पूरे देश में काला जादू विरोधी कानून की मांग उठाई गई.
  • रिसर्च खर्च को GDP के कम से कम 3% तक बढ़ाने और शिक्षा के लिए ज्यादा बजट देने की मांग की गई.

देश के कई वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से E20 फ्यूल के रोलआउट को रोकने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA को खत्म करने और पूरे देश में काला जादू विरोधी कानून बनाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि सरकार की नीतियां वैज्ञानिक तथ्यों और सबूतों के आधार पर बननी चाहिए।.

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मुंबई में शनिवार को आयोजित 'इंडिया मार्च फॉर साइंस' के दौरान एक साझा अपील जारी की गई. इसमें वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं ने छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक सबूतों को नजरअंदाज करने वाली नीतियों और शिक्षा तथा रिसर्च पर घटते सरकारी खर्च को लेकर चिंता जताई.

इस अपील पर कई जाने-माने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने हस्ताक्षर किए हैं. इनमें CEBS मुंबई के पद्म भूषण सम्मानित प्रो. एम. एस. रघुनाथन, ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. एस. जी. दानी, HBCSE-TIFR के प्रो. अनिकेत सुले, मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रो. बी. एम. अरोड़ा, पूर्व TIFR वैज्ञानिक डॉ. एन. कृष्णन और मुंबई प्रेस क्लब के सचिव अनिल कुमार सिंह शामिल हैं.

E20 फ्यूल को लेकर क्या है मांग?

वैज्ञानिकों के समूह ने E20 फ्यूल पॉलिसी के मौजूदा रोलआउट को रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि इस नीति को आगे बढ़ाने से पहले इसके पूरे पर्यावरणीय असर का आकलन किया जाना चाहिए।. इसके अलावा, E20 फ्यूल के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और इससे जुड़े दूसरे प्रभावों पर भी विस्तृत अध्ययन होना चाहिए.

E20 पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल मिलाया जाता है. सरकार इसे पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने और तेल आयात पर निर्भरता कम करने की योजना के तहत आगे बढ़ा रही है.

इससे पहले भी कई विपक्षी दल E20 फ्यूल को लेकर सवाल उठा चुके हैं. आम आदमी पार्टी और शिवसेना (UBT) समेत कुछ दलों ने इसके असर, माइलेज और पुराने वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सरकार की आलोचना की है.

NTA को खत्म करने की मांग

वैज्ञानिकों की अपील में परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. हाल के वर्षों में पेपर लीक और NEET से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को खत्म करने की मांग की है.

समूह का कहना है कि देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत है, ताकि परीक्षाओं को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सके.

पर्यावरण को लेकर भी जताई चिंता

वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चेतावनी दी है. उन्होंने पिघलते ग्लेशियर, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, कमजोर होते इकोसिस्टम और कई प्रजातियों के तेजी से खत्म होने पर चिंता जताई.

उनका कहना है कि पर्यावरण से जुड़ी नीतियां भी वैज्ञानिक रिसर्च और भरोसेमंद डेटा के आधार पर तैयार होनी चाहिए.

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शिक्षा और रिसर्च पर ज्यादा खर्च की मांग

समूह ने सरकार से शिक्षा और रिसर्च पर खर्च बढ़ाने की भी मांग की है. उनकी मांग है कि केंद्र सरकार अपने बजट का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा शिक्षा के लिए रखे, जबकि राज्य सरकारें अपने बजट का कम से कम 30 फीसदी शिक्षा पर खर्च करें.

इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने रिसर्च और डेवलपमेंट पर होने वाले कुल खर्च को GDP के मौजूदा करीब 0.7 फीसदी से बढ़ाकर कम से कम 3 फीसदी करने की मांग की है.

आयोजकों ने 'विज्ञान अपनाएं, भविष्य सुरक्षित करें' का नारा देते हुए वैज्ञानिकों, शिक्षकों, छात्रों और आम लोगों से वैज्ञानिक सोच और तार्किक नजरिया अपनाने की अपील की. उनका कहना है कि देश के भविष्य से जुड़े फैसले तथ्यों, रिसर्च और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर होने चाहिए.