
Riyadh Airport Strike: खतरे की चेतावनी बंद, फिर एयरपोर्ट पर हमला! सऊदी अरब की सुरक्षा पर उठे सवाल
सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमलों में 18 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों से कुछ दिन पहले ही सरकार ने लोगों को खतरे की चेतावनी देना बंद कर दिया था। आखिर क्यों रोके गए सिक्योरिटी अलर्ट और अब क्या सवाल उठ रहे हैं?

In Short
- रियाद एयरपोर्ट पर हमलों में 18 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल।
- सऊदी अरब ने हमलों से पहले बंद कर दिए थे पब्लिक सिक्योरिटी अलर्ट।
- चेतावनी बंद करने के फैसले पर उठे सवाल, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता।
सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एयरपोर्ट पर हुए हमलों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों से कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब ने लोगों को संभावित सैन्य हमलों की चेतावनी देना बंद कर दिया था। रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकार ने खतरे की जानकारी लोगों तक क्यों नहीं पहुंचाई?
29 सितंबर के बाद बंद हो गई थी चेतावनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि बढ़ते हमलों के बावजूद देश का अर्ली वॉर्निंग सिस्टम अचानक शांत क्यों हो गया था।
सऊदी सिविल डिफेंस अथॉरिटी के सोशल मीडिया अकाउंट के अनुसार, हमलों से पहले आखिरी सार्वजनिक चेतावनी 29 सितंबर को दक्षिणी प्रांत नजरान के लिए जारी की गई थी। इसके बाद लोगों को कोई नया अलर्ट नहीं मिला। इस फैसले से देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
लोगों की नींद खराब होने की वजह से रोके अलर्ट?
अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटनी के मुताबिक, सऊदी अरब हूती विद्रोहियों का जवाब देना चाहता है, लेकिन साथ ही सामान्य जनजीवन को प्रभावित होने से बचाना चाहता है। हालांकि, चेतावनी नहीं मिलने से लोगों में डर और अनिश्चितता बढ़ रही है।
मामले की जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों ने बताया कि एक पश्चिमी देश ने हमलों से पहले सऊदी अधिकारियों से अलर्ट बंद करने की वजह पूछी थी। जवाब में बताया गया कि रात में चेतावनी मिलने से लोगों की नींद खराब होती थी और इसकी शिकायतें मिल रही थीं। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इस दावे पर कोई जवाब नहीं दिया।

दूसरे खाड़ी देशों में जारी रहे अलर्ट
सऊदी अरब ने मई में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जरिए हमलों की चेतावनी देना शुरू किया था। वहीं, कतर मोबाइल अलर्ट भेजता रहा, जबकि बहरीन और कुवैत में सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी गई।
सोमवार को सऊदी सिविल डिफेंस ने 29 सितंबर के बाद पहली बार रियाद और दक्षिणी शहरों के लिए संभावित खतरों की चेतावनी जारी की। पश्चिमी देशों के दूतावास भी अपने कर्मचारियों को मिसाइल और ड्रोन हमलों के आंतरिक अलर्ट भेजते रहे हैं। हालांकि, शनिवार को एयरपोर्ट पर हुए हमले से पहले दूतावासों को भी कोई आंतरिक चेतावनी नहीं मिली थी।
हमलों के बीच भी जारी आर्थिक गतिविधियां
सऊदी विश्लेषक अली शिहाबी के मुताबिक, देश का विशाल क्षेत्रफल और बड़ी संख्या में एयरपोर्ट, तेल पाइपलाइन और तेल प्रतिष्ठान होने के कारण हर जगह हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल है।
इन हमलों के बावजूद सोमवार को रियाद में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन आयोजित हुआ। हालांकि, कई बड़ी तेल कंपनियों के अधिकारी इसमें शामिल नहीं हुए। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा कि सम्मेलन होने का मतलब यह नहीं है कि खतरे खत्म हो गए हैं। उन्होंने साफ किया कि सऊदी अरब अपनी आर्थिक महत्वाकांक्षाओं पर काम जारी रखेगा।

