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तिब्बत से काठमांडू लौटे सद्गुरु, भोटे कोशी बाढ़ में फंसे 77 यात्रियों का अब तक कोई सुराग नहीं

सद्गुरु तिब्बत से नेपाल लौटकर काठमांडू पहुंच गए हैं, लेकिन ग्यिरोंग में फंसे ईशा के 77 यात्रियों को लेकर चिंता बनी हुई है। संगठन का कहना है कि अब तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। चीनी अधिकारियों ने इलाके में तलाश और बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया है।

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In Short

  • सद्गुरु तिब्बत से नेपाल लौट आए हैं और फिलहाल काठमांडू में मौजूद हैं।
  • ग्यिरोंग के आव्रजन कार्यालय में फंसे ईशा के 77 यात्रियों का अब तक कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला है।
  • चीनी अधिकारियों ने 28 अगस्त को तलाश और बचाव अभियान दोबारा शुरू किया, जबकि ईशा की टीमें दोनों तरफ से जानकारी जुटा रही हैं।

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु तिब्बत से नेपाल लौट आए हैं और फिलहाल काठमांडू में हैं। ईशा फाउंडेशन की समन्वयक मां गंभीरि के मुताबिक सद्गुरु कुछ समय तक तिब्बत में ही रुके थे।

उनका मकसद भोटे कोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित इलाके तक पहुंचना और राहत कार्य में मदद करना था।ईशा फाउंडेशन ने शनिवार को कहा कि तिब्बत के ग्यिरोंग स्थित इमिग्रेशन ऑफिस में फंसे उसके 77 यात्रियों को लेकर अब तक कोई उत्साहजनक संकेत नहीं मिला है। ये सभी यात्री मानसरोवर यात्रा से लौट रहे थे और 26 अगस्त की बाढ़ के दौरान आव्रजन केंद्र में मौजूद थे।

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सड़क के रास्ते घटनास्थल जाना चाहते थे सद्गुरु

मां गंभीरि के मुताबिक भारत सरकार की तरफ से सद्गुरु के हवाई रास्ते से लौटने को लेकर काफी जोर था, लेकिन उनकी योजना अलग थी।उन्होंने बताया कि सद्गुरु उस जगह तक जाना चाहते थे जहां यह हादसा हुआ, ताकि वहां हर संभव सहायता की जा सके। इसके लिए वह सड़क के रास्ते जाना चाहते थे।उनके इस फैसले की एक वजह ईशा फाउंडेशन के 700 से ज्यादा सदस्य भी थे, जो उस समय तिब्बत में मौजूद थे। संगठन चाहता था कि उनके सुरक्षित बाहर निकलने के लिए भी कोई रास्ता निकाला जा सके।

 ग्यिरोंग जाने की नहीं मिली इजाजत

ईशा फाउंडेशन की टीम ने ग्यिरोंग तक पहुंचने के लिए आधिकारिक मंजूरी लेने की कोशिश की। लेकिन चीनी सेना और बचाव दलों ने इलाके में तलाश और बचाव अभियान के कारण आवाजाही पर रोक लगा रखी थी।इस वजह से सद्गुरु और उनकी टीम घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके। मां गंभीरि ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह पता न चल पाना था कि हादसे में फंसे 77 यात्रियों के साथ आखिर क्या हुआ।

ईशा फाउंडेशन के मुताबिक अचानक आई तेज बाढ़ में ग्यिरोंग का आव्रजन कार्यालय पूरी तरह बह गया है।

 तस्वीरों और वीडियो से जुटाई जा रही जानकारी

संगठन का कहना है कि उसे अब तक लापता यात्रियों को लेकर कोई पुख्ता आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इसलिए टीम तस्वीरों, वीडियो, मौके के दृश्यों और चीनी मीडिया की खबरों के जरिए हालात समझने की कोशिश कर रही है। मां गंभीरि ने कहा कि घटनास्थल तक न पहुंच पाना टीम के लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद मुश्किल रहा। संगठन यह भी समझता है कि लापता लोगों के परिवार किस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।

परिवारों की मदद के लिए कई देशों में स्वयंसेवक सक्रिय

ईशा फाउंडेशन ने अलग-अलग देशों में अपने स्वयंसेवकों को सक्रिय किया है। ये स्वयंसेवक यात्रियों के परिवारों से संपर्क कर रहे हैं और कई मामलों में उनसे व्यक्तिगत रूप से भी मिल रहे हैं।परिवारों के लिए सहायता नंबर भी शुरू किए गए हैं।

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मां गंभीरि के मुताबिक इन नंबरों पर लगातार फोन आ रहे हैं और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक लोगों को जरूरी सहायता और जानकारी देने में लगे हुए हैं। काठमांडू में भी एक दल बनाया गया है, जिसका काम अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटाकर परिवारों तक पहुंचाना है।

 ग्यिरोंग के पास भी मौजूद है ईशा की टीम

ईशा फाउंडेशन की एक टीम तिब्बत की तरफ ग्यिरोंग के पास उस जगह पर तैनात है जहां तक जाने की इजाजत मिल रही है। यह टीम वहां से मिलने वाली जानकारी संगठन तक पहुंचा रही है।संगठन के मुताबिक नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ उसकी टीमें उन सबसे नजदीकी जगहों पर मौजूद हैं जहां अधिकारियों ने पहुंचने की अनुमति दी है।

 28 अगस्त को दोबारा शुरू हुआ तलाश और बचाव अभियान

ईशा फाउंडेशन ने एक्स पर जारी जानकारी में बताया कि चीनी अधिकारियों ने 28 अगस्त को दोपहर के आसपास ग्यिरोंग पोर्ट पर तलाश और बचाव अभियान दोबारा शुरू किया।दूसरी बाढ़ के खतरे के कारण कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा था।संगठन के मुताबिक मौके पर मौजूद टीमों ने अलग-अलग तस्वीरों और उपलब्ध जानकारी की जांच की है। फिलहाल आव्रजन कार्यालय वाले इलाके से यात्रियों के जीवित मिलने को लेकर कोई उत्साहजनक संकेत नहीं मिला है।

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ईशा फाउंडेशन ने कहा कि आव्रजन कार्यालय का पूरा परिसर बह चुका है। संगठन लगातार सार्वजनिक स्रोतों और मौके पर मौजूद लोगों से मिल रही जानकारी की पुष्टि कर रहा है।

काठमांडू में हैं सद्गुरु

सद्गुरु अब नेपाल पहुंच चुके हैं और काठमांडू में हैं। ईशा फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 30 अगस्त को काठमांडू में उनका “In Solidarity with Nepal” कार्यक्रम भी रखा गया है। इसका मकसद बाढ़ प्रभावित नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता दिखाना है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन 77 ईशा यात्रियों को लेकर बनी हुई है जो ग्यिरोंग के आव्रजन कार्यालय में बाढ़ के दौरान फंस गए थे। तलाश और बचाव अभियान जारी है और संगठन परिवारों तक जानकारी पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रहा है।