
BRICS Summit में Modi-Xi की बड़ी बैठक संभव, गलवान से अरुणाचल तक इन मुद्दों पर रहेगी नजर
PM नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच BRICS Summit के दौरान संभावित मुलाकात पर दुनिया की नजर है। Galwan Valley संघर्ष के बाद पहली बार दोनों नेता आमने-सामने बातचीत कर सकते हैं। जानिए क्यों अहम मानी जा रही है यह बैठक और किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा।

In Short
- पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच BRICS Summit के दौरान संभावित द्विपक्षीय बैठक 2020 के Galwan Valley संघर्ष के बाद पहली आमने-सामने बातचीत हो सकती है।
- Galwan झड़प के बाद भारत-चीन रिश्तों में तनाव बढ़ा था, लेकिन LAC पर सैनिकों की वापसी के बाद दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे स्थिरता लाने की कोशिश जारी है।
- संभावित बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और LAC पर तनाव रोकने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit के दौरान द्विपक्षीय बैठक की संभावना है। अगर यह बैठक होती है तो यह 2020 के Galwan Valley संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने बातचीत होगी। इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें रहेंगी क्योंकि भारत और चीन लंबे समय बाद रिश्तों में सुधार की कोशिश कर रहे हैं।
BRICS Summit में शामिल होने भारत आएंगे Xi Jinping
शी जिनपिंग 18वें BRICS Leaders' Summit में हिस्सा लेने के लिए 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचेंगे। भारत इस बार BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है, जो 12 और 13 सितंबर को आयोजित होगा।
यह शी जिनपिंग की सात साल बाद पहली भारत यात्रा होगी। वहीं, 2020 के सीमा विवाद के बाद यह उनकी पहली यात्रा होगी। हालांकि, अभी तक भारत और चीन की ओर से इस संभावित द्विपक्षीय बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
Galwan संघर्ष के बाद बिगड़े थे रिश्ते
भारत और चीन के रिश्तों में तनाव जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की Galwan Valley में हुई हिंसक झड़प के बाद बढ़ गया था। इस संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, जबकि चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी।
इस घटना के बाद Line of Actual Control (LAC) पर लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहा और दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ा।
सीमा विवाद के बीच जारी रही बातचीत
तनाव के बाद दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की। इसका उद्देश्य सीमा पर तैनात सैनिकों को पीछे हटाना और टकराव वाले क्षेत्रों में तनाव कम करना था।

हाल के समय में LAC के कुछ इलाकों से सैनिकों की वापसी के बाद दोनों देशों के बीच स्थिति में कुछ स्थिरता आई है। हालांकि, सीमा विवाद अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।
अरुणाचल प्रदेश बना अहम मुद्दा
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में अरुणाचल प्रदेश एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे "जंगनान" या दक्षिणी तिब्बत कहता है।
भारत ने चीन के इस दावे को लगातार खारिज किया है और कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों को भी भारत ने अस्वीकार किया है।
मोदी-Xi बैठक में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
संभावित बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश, लोगों के बीच संपर्क और LAC पर तनाव रोकने के उपायों पर चर्चा हो सकती है।
भारत की कोशिश रहेगी कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे, साथ ही आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग के रास्ते भी खुले रहें। वहीं चीन BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

