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ग्रोथ नहीं मुनाफे और कैश कमाने वाले बिजनेस बनाना चाहती है PhonePe! जल्द आने वाला है आईपीओ

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में फोनपे की आय में करीब 22% की बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले कम है। अगर इस झटके को हटाकर देखें, तो कंपनी का कोर बिजनेस अब भी काफी मजबूत नजर आता है।

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फिनटेक दिग्गज फोनपे (PhonePe) की वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में इनकम में बढ़ोतरी थोड़ी धीमी रही है। हालांकि कंपनी अब हर कीमत पर ग्रोथ के बदले एक मुनाफे वाले और कैश कमाने वाले बिजनेस के रूप में खुद को ढाल रही है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब कंपनी अपना आईपीओ (OFS के जरिए) लाने की तैयारी में है।

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वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में फोनपे की आय में करीब 22% की बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले कम है। अगर इस झटके को हटाकर देखें, तो कंपनी का कोर बिजनेस अब भी काफी मजबूत नजर आता है। फोनपे के सीईओ समीर निगम ने कहा कि 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के रेवेन्यू बेस पर 22% की ग्रोथ कोई मामूली बात नहीं है। 

फोनपे के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है, पेमेंट प्रोसेसिंग की लागत कम होती जा रही है। इसके अलावा, कंपनी अब इंश्योरेंस और वेल्थ प्रोडक्ट्स जैसे ज्यादा मार्जिन वाले कामों पर ध्यान दे रही है। 

पूरी तरह OFS होगा आईपीओ

फोनपे का आगामी आईपीओ पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी बाजार से नया पैसा नहीं मांग रही, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

एक्सपर्ट का मानना है कि यह इस बात का सबूत है कि कंपनी को अपने बिजनेस मॉडल पर पूरा भरोसा है और उसके पास ऑपरेशन्स चलाने के लिए पर्याप्त कैश मौजूद है। यह निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि मैनेजमेंट अब बाहर से पैसा लेने के बजाय अपने दम पर मुनाफा कमाने की राह पर चल पड़ा है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या फोनपे की नई सेवाएं जैसे इंश्योरेंस और मर्चेंट टूल्स आने वाले समय में बड़ी आय का जरिया बन पाती हैं या नहीं। भारत के डिजिटल पेमेंट बाजार में मुकाबला बहुत कड़ा है और रेगुलेटरी बदलाव कभी भी खेल बदल सकते हैं।