चेहरा नहीं दिखा तो चाल बनेगी सबूत! केतन अग्रवाल मर्डर केस में गेट एनालिसिस कैसे बदल सकता है पूरी जांच?
केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब जांच ऐसी दिशा में बढ़ रही है, जहां चेहरा नहीं बल्कि एक छोटी सी हरकत बड़ा सुराग बन सकती है। पुलिस इसी कड़ी से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। आखिर क्या है यह तरीका और कैसे इससे जांच को मदद मिल सकती है, जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर।

In Short
- CCTV में चेहरा साफ नहीं दिख रहा, इसलिए पुलिस आरोपी की पहचान के लिए गेट एनालिसिस की मदद ले सकती है।
- गेट एनालिसिस जांच को मजबूत कर सकता है, लेकिन कोर्ट में इसे बाकी सबूतों जैसे मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और गवाहों के बयान के साथ देखा जाएगा।
केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस की जांच अब एक नए फोरेंसिक एंगल की तरफ बढ़ती दिख रही है। CCTV फुटेज में आरोपी चेतन चौधरी का चेहरा साफ नजर नहीं आने के बाद जांच एजेंसियां अब उसकी चाल को अहम सुराग मानकर देख सकती हैं। माना जा रहा है कि आरोपी की पहचान के लिए गेट एनालिसिस की मदद ली जा सकती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गेट एनालिसिस होता क्या है और यह किसी आरोपी तक पहुंचने में कैसे मदद करता है?
क्या होता है गेट एनालिसिस?
गेट एनालिसिस का मतलब है किसी इंसान के चलने के तरीके को देखना और समझना। हर इंसान की चाल अलग होती है। कोई लंबे कदम रखता है, कोई तेज चलता है, कोई चलते समय थोड़ा झुकता है, तो किसी के हाथ चलने के दौरान अलग तरह से हिलते हैं। पैर रखने का तरीका, कदमों की लंबाई, चलने की रफ्तार और शरीर को संभालकर चलने का तरीका भी हर इंसान में अलग हो सकता है।
इन्हीं बातों को देखकर किसी इंसान के चलने का तरीका समझा जाता है और पहचान में मदद ली जाती है।
CCTV फुटेज से कैसे होगी चेतन की पहचान?
इस केस में चेतन चौधरी की पहचान के लिए पुलिस CCTV फुटेज में दिख रही उसकी चाल को ध्यान से देख सकती है। इसके लिए चेतन के पुराने वीडियो निकाले हैं। इनमें सोशल मीडिया के वीडियो, परिवार के वीडियो या किसी और जगह की रिकॉर्डिंग शामिल हो सकती है।
इसके बाद जांच करने वाले लोग CCTV फुटेज और पुराने वीडियो को एक-एक करके देखेंगे। वे यह मिलाने की कोशिश करेंगे कि फुटेज में दिख रहे इंसान की चाल, कदमों की लंबाई, चलने की रफ्तार, शरीर का झुकाव और हाथ-पैरों की हरकत चेतन की चाल से कितनी मिलती है।
चेहरा छिपने पर चाल बन सकती है अहम सुराग
गेट एनालिसिस उन मामलों में मददगार माना जाता है, जहां आरोपी का चेहरा साफ दिखाई नहीं देता। अगर आरोपी ने मास्क पहना हो, हेलमेट लगाया हो या CCTV फुटेज साफ न हो, तब उसकी चाल से पहचान में मदद मिल सकती है।
चेहरा छिपाया जा सकता है, लेकिन चलने का तरीका पूरी तरह बदलना आसान नहीं होता। इसलिये कई मामलों में आरोपी की चाल जांच के लिए अहम सुराग बन सकती है।
जांच में चाल से मिल सकती है नई मदद
गेट एनालिसिस पुलिस की जांच में मदद कर सकता है, लेकिन अदालत में इसे ज्यादातर मामलों में अकेला सबूत नहीं माना जाता। इसे मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स, गवाहों के बयान और बाकी सबूतों के साथ देखा जाता है।
अगर CCTV में दिख रही चाल चेतन चौधरी की चाल से मिलती है और बाकी सबूत भी उसी ओर इशारा करते हैं, तो पुलिस का केस मजबूत हो सकता है। केतन अग्रवाल मर्डर केस में यह तरीका जांच को आगे बढ़ाने में अहम मदद कर सकता है।

