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1962 युद्ध के वीर जसवंत सिंह रावत का पुश्तैनी घर बनेगा म्यूजियम, ऐसे बदलेगी 60 साल पुरानी विरासत

1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए गढ़वाल राइफल्स के जवान जसवंत सिंह रावत की यादों को अब नया रूप देने की तैयारी है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित उनके पुश्तैनी घर को म्यूजियम में बदलने की योजना है। इसमें उनके जीवन, सैन्य सेवा और वीरता से जुड़ी यादें संजोई जाएंगी।

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शहीद जवान जसवंत सिंह रावत

1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए गढ़वाल राइफल्स के जवान जसवंत सिंह रावत का उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित पुश्तैनी घर अब म्यूजियम में बदला जाएगा। बीजेपी सांसद अनिल बलूनी ने बीते सोमवार को बताया कि रावत के पैतृक गांव बरयूं में मौजूद यह घर लंबे समय से वीरान था और इसकी हालत खराब हो चुकी थी।

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परिवार ने दी सहमति

गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद बलूनी पिछले हफ्ते जसवंत सिंह रावत के गांव पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने जसवंत सिंह का घर देखने की इच्छा जताई तो पता चला कि वहां कोई नहीं रहता और घर खंडहर में बदल चुका है।

बीजेपी सांसद अनिल बलूनी के मुताबिक, ग्रामीण चाहते थे कि इस घर को संरक्षित करके म्यूजियम बनाया जाए। इसके बाद उन्होंने जसवंत सिंह रावत के भाई से फोन पर बात की और परिवार की सहमति ली। परिवार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

प्रस्तावित म्यूजियम उसी जगह बनेगा, जहां जसवंत सिंह रावत का पुश्तैनी घर मौजूद है। इसके लिए पहले फीजिबिलिटी स्टडी और आर्किटेक्ट से सलाह ली जाएगी। अनिल बलूनी ने बताया कि वह प्रोजेक्ट के लिए अपने MPLADS फंड का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।

17 नवंबर को होगा भूमि पूजन

म्यूजियम की नींव रखने के लिए 17 नवंबर की तारीख तय करने की योजना है। इसी दिन 1962 में नूरानांग की लड़ाई के दौरान जसवंत सिंह रावत शहीद हुए थे। अनिल बलूनी ने कहा कि वह उस दिन भूमि पूजन करना चाहते हैं।

वह तवांग के पास स्थित जसवंत गढ़ युद्ध स्मारक से मिट्टी भी लाने की योजना बना रहे हैं। इस मिट्टी को घर की नींव में इस्तेमाल किया जाएगा।

21 साल की उम्र में हुए थे शहीद

जसवंत सिंह रावत 4th बटालियन, गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। 19 साल की उम्र में 19 अगस्त 1960 को सेना में भर्ती हुए रावत ने 1962 में नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी, वर्तमान अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के खिलाफ नूरानांग की लड़ाई लड़ी।

शहादत के समय उनकी उम्र सिर्फ 21 साल थी। उन्हें मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

अनिल बलूनी ने कहा कि जसवंत सिंह रावत गढ़वाल राइफल्स की सैन्य परंपरा में खास स्थान रखते हैं। प्रस्तावित म्यूजियम में उनके जीवन और सैन्य सेवा से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। ग्रामीणों के सुझाव पर उनके पुश्तैनी घर तक जाने वाले रास्ते और एक गेट को भी रावत के नाम से बनाने की योजना है।

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