
प्लेसमेंट सीजन से पहले IIT का बड़ा फैसला, 22 कंपनियों पर दो साल तक कैंपस भर्ती रोक
प्लेसमेंट सीजन से पहले IIT ने उन 22 कंपनियों पर दो साल की रोक लगाने का फैसला किया है, जिन्होंने छात्रों को ऑफर देने के बाद नौकरी नहीं दी। AIPC की बैठक में यह फैसला लिया गया। प्रभावित छात्रों की मदद के लिए IIT प्लेसमेंट ऑफिस नए अवसर तलाशने में जुटे हैं।

In Short
- IIT ने उन 22 कंपनियों को अगले दो प्लेसमेंट सीजन से बाहर रखने का फैसला किया है, जिन्होंने ऑफर देने के बाद नौकरी पूरी नहीं की।
- AIPC की बैठक में लिया गया फैसला, 23 IIT में 150 से ज्यादा जॉब ऑफर प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।
- - प्रभावित छात्रों की मदद के लिए IIT प्लेसमेंट ऑफिस कंपनियों के साथ सीवी साझा कर रहे हैं, जिससे कई छात्रों को नौकरी मिली है।
प्लेसमेंट सीजन शुरू होने से पहले आईआईटी छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। आईआईटी संस्थानों ने उन 22 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया है, जिन्होंने छात्रों को नौकरी के ऑफर देने के बाद बाद में उन्हें पूरा नहीं किया या ऑफर वापस ले लिए।
अब इन कंपनियों को अगले दो कैंपस प्लेसमेंट सीजन में छात्रों की भर्ती प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा। यह फैसला उन छात्रों की परेशानी को देखते हुए लिया गया है, जिन्हें नौकरी के ऑफर मिलने के बाद भी रोजगार नहीं मिल पाया।
23 IIT में 150 से ज्यादा ऑफर हुए प्रभावित
इन कंपनियों ने पिछले शैक्षणिक सत्र में 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को नौकरी के ऑफर दिए थे। लेकिन बाद में कई ऑफर वापस ले लिए गए या कंपनियां उन्हें पूरा करने में पीछे हट गईं।
छात्रों को हुई परेशानी के बाद आईआईटी संस्थानों ने ऐसी कंपनियों के साथ कैंपस रिक्रूटमेंट में सहयोग नहीं करने का फैसला किया है। यह फैसला इस समय लिया गया है जब देशभर के आईआईटी संस्थान नए प्लेसमेंट सीजन की तैयारी कर रहे हैं।
IIT गुवाहाटी में हुई बैठक में लिया गया फैसला
यह फैसला इस महीने की शुरुआत में आईआईटी गुवाहाटी में हुई ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) की बैठक में लिया गया। AIPC वह सेंट्रल बॉडी है जो आईआईटी कैंपस में प्लेसमेंट और इंटर्नशिप से जुड़ी गाइडलाइन को देखती है।
AIPC के समन्वयक और आईआईटी गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस ने बताया कि इन मामलों में 23 आईआईटी के 150 से ज्यादा ऑफर शामिल हैं। इनमें कुछ कंपनियों ने 10 से 15 ऑफर तक वापस ले लिए हैं।

हालांकि, उन्होंने कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
ब्लैकलिस्टिंग नहीं बल्कि नॉन-कोऑपरेशन कहा जाएगा
आईआईटी पैनल ने इस फैसले को ब्लैकलिस्टिंग शब्द से संबोधित नहीं करने का फैसला किया है। इसके बजाय इसे नॉन-कोऑपरेशन कहा जाएगा।
कैंपस सूत्रों के मुताबिक, ओरेकल उन कंपनियों में शामिल है जो दो साल से नॉन-कोऑपरेशन का सामना कर रही है। कंपनी पर आरोप है कि वह आईआईटी छात्रों को दिए गए करीब 40 ऑफर पूरे नहीं कर पाई।
इसके अलावा कई स्टार्टअप भी उन कंपनियों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
प्रभावित छात्रों की मदद कर रहे IIT
ऑफर रद्द होने से प्रभावित छात्रों की मदद के लिए आईआईटी प्लेसमेंट ऑफिस भी कोशिश कर रहे हैं। प्लेसमेंट कार्यालयों ने इन छात्रों के सीवी मौजूदा भर्तीकर्ताओं के बीच साझा किए हैं और उनसे उपलब्ध पदों के लिए उम्मीदवारों पर विचार करने का अनुरोध किया है।
अनुमान है कि प्रभावित छात्रों में से करीब 20 से 30 फीसदी छात्रों को इस तरह के संपर्क के जरिए नौकरी मिल गई है।
हालांकि, आईआईटी के पास अभी उन छात्रों की पूरी संख्या नहीं है जो अब भी नौकरी की तलाश में हैं। कुछ छात्रों ने अपने संस्थानों को जानकारी दिए बिना कैंपस के बाहर आवेदन या व्यक्तिगत नेटवर्क के जरिए रोजगार हासिल कर लिया होगा।

