₹10 की चीज ₹450 में! हर्ष गोयनका ने बताया कैसे ग्लोबल बनेगी झालमुरी
हर्ष गोयनका ने कहा कि झालमुरी सही ब्रांडिंग के साथ ग्लोबल सुपरफूड बन सकती है। पीएम के वायरल वीडियो के बाद इसकी मांग बढ़ी है। यह सस्ता, हल्का और हेल्दी स्नैक है, जिसे प्रीमियम बनाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा अवसर बनाया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में सड़क किनारे झालमुरी खाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अनियोजित ठहराव अब एक बड़े बिजनेस मौके में बदलता दिख रहा है। इस छोटे से पल ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर धूम मचाई, बल्कि इस पारंपरिक स्नैक को ग्लोबल मंच पर ले जाने की चर्चा भी तेज कर दी है।
मोदी के इस दौरे का वीडियो 24 घंटे के भीतर इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर करीब 9 करोड़ व्यूज पार कर गया। वहीं 'झालमुरी' की गूगल सर्च 22 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
एक स्टॉल से उठी ग्लोबल चर्चा
चार रैलियों के व्यस्त कार्यक्रम के बीच मोदी ने यह ब्रेक लिया और बाद में खुद सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने लिखा 'झाड़ग्राम में स्वादिष्ट झालमुड़ी का आनंद लिया।' इस वायरल मोमेंट ने उद्योग जगत का ध्यान भी खींचा। हर्ष गोयनका ने इसे 'पूरे इंडस्ट्री को फुलाने वाला पल' बताया।
‘सुपरफूड’ बनने की संभावना
गोयनका ने झालमुड़ी को 'भारत का बेस्ट स्ट्रीट फूड' बताते हुए कहा कि यह क्विनोआ और एवोकाडो जैसे ग्लोबल ट्रेंड्स की राह पकड़ सकता है। उनके मुताबिक, सही ब्रांडिंग इसे प्रीमियम प्रोडक्ट बना सकती है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर इसे 'air-infused indigenous rice crackle…' जैसे नाम से पेश किया जाए, तो यही स्नैक ₹450 में बिक सकता है।
सादगी ही सबसे बड़ी ताकत
गोयनका के अनुसार, झालमुड़ी की तीन बड़ी खूबियां हैं- हल्का, स्वादिष्ट और सस्ता। उन्होंने कहा कि यह guilt-free है, स्वाद जगाता है और हर किसी की पहुंच में है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है- 'mix, toss, eat, smile'
ग्लोबल एक्सपोर्ट का मौका?
यह पहली बार नहीं है जब किसी लोकल फूड को वैश्विक पहचान मिलने की चर्चा हो रही है, लेकिन इस बार ट्रिगर खुद प्रधानमंत्री का एक छोटा सा स्टॉप बना। अब नजर इस पर है कि क्या यह वायरल मोमेंट वाकई एक नए एक्सपोर्ट प्रोडक्ट में बदल पाता है।

