
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए अब फॉर्म-7 की लिमिट तय, चुनाव आयोग ने जारी किए निर्देश
वोट चोरी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने फॉर्म-7 को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। अब एक मतदाता महीने में अधिकतम पांच आवेदन कर सकता है। वहीं नाम हटाने से पहले अधिकारी आपत्ति की जांच और सुनवाई करेंगे। इस बीच CJP के तीन नेताओं को हिरासत में लिया गया।

In Short
- फॉर्म-7 से जुड़ा नया नियम, एक महीने में अधिकतम 5 आवेदन।
- नाम हटाने से पहले ERO करेगा सुनवाई और सबूतों की जांच।
- CJP के प्रदर्शन से पहले अभिजीत दिपके समेत तीन नेता हिरासत में।
देशभर में वोट चोरी के आरोपों को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से फॉर्म-7 भरने की सीमा तय की है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि इस फॉर्म के जरिए दर्ज होने वाली आपत्तियों की जांच और उनका निपटारा किस तरह किया जाएगा।
महीने में कितनी बार भर सकते हैं फॉर्म-7?
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की पूरी अवधि के दौरान कोई भी मतदाता व्यक्तिगत रूप से अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन भर सकता है। वहीं, मतदाता सूची के निरंतर अद्यतनीकरण यानी Continuous Updation के दौरान यह सीमा अलग होगी।
इस अवधि में कोई भी मतदाता एक महीने में अधिकतम पांच फॉर्म-7 आवेदन दाखिल कर सकता है। ये सीमाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन करने पर लागू होंगी।
फॉर्म-7 मिलने के बाद क्या करेगा चुनाव आयोग?
निर्देशों के मुताबिक, फॉर्म-7 मिलने के बाद निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी करेगा। यह नोटिस सीधे या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की अनुशंसा के आधार पर जारी किया जा सकता है।
इसके बाद अधिकारी आपत्तिकर्ता की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई करेगा। हर फॉर्म-7 के मामले में आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का अलग-अलग बयान लिया जाएगा। उसके तर्कों और सबूतों को भी दर्ज किया जाएगा। अधिकारी को खुद इस बात से संतुष्ट होना होगा कि आपत्ति सही है या नहीं।
जिस नाम पर आपत्ति होगी उसे भी मिलेगा मौका
फॉर्म-7 के जरिए दर्ज आपत्तियों का निपटारा करने के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को तय प्रक्रिया का पालन करना होगा। जब अधिकारी आपत्ति की वैधता को लेकर संतुष्ट हो जाएगा, तो वह निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 19 और 20 के तहत आवेदन पर फैसला करेगा।

इस प्रक्रिया में केवल आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि जिस व्यक्ति के नाम या आवेदन पर आपत्ति जताई गई है, उसे भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।
वोट चोरी के आरोपों के बीच CJP का प्रदर्शन
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
बताया गया कि तीनों के खिलाफ फ्लाइट के अंदर ही कार्रवाई की गई। इसके बाद पुलिस उन्हें बस में बैठाकर अपने साथ ले गई। विमान के अंदर हुई इस कार्रवाई और फिर पुलिस की बस से तीनों को ले जाने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है।

