डोनाल्ड ट्रंप का सख्त कदम! ईरान के तेल पर 30 दिन की सैंक्शन छूट आगे नहीं बढ़ेगी - क्रूड ऑयल पर बढ़ सकता है दबाव
यूएस द्वारा ईरान के समुद्री तेल पर दी गई 30 दिन की सैंक्शन छूट खत्म कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यह कदम ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को और सख्त बनाता है, जिससे ईरान की तेल सप्लाई, वैश्विक बाजार और चीन समेत अन्य देशों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका ने ईरान के समुद्री तेल पर दी गई 30 दिन की सैंक्शन छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। यह छूट इस हफ्ते खत्म हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस कदम को ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इससे पहले रूस के तेल पर भी ऐसी ही छूट चुपचाप खत्म हो चुकी है। अब अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से होने वाली तेल सप्लाई पर सख्त रोक लगाने की दिशा में बढ़ रहा है।
‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति और सख्त
अमेरिकी अधिकारियों ने इसे ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ का हिस्सा बताया है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में उसकी गतिविधियों को लेकर अपनाई गई ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को और आक्रामक बनाता है। हालांकि प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल अब भी चीन तक पहुंच रहा है, जिससे अमेरिका की रणनीति को चुनौती मिल रही है।
बीते 20 मार्च को US Treasury Department ने यह छूट दी थी, जिससे करीब 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार तक पहुंच सका था। इससे ऊर्जा सप्लाई पर दबाव कुछ कम हुआ था। लेकिन ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ किया कि 19 अप्रैल को खत्म हो रही इस छूट को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। रूस के तेल के लिए भी यही रुख अपनाया गया है।
बैंकों और देशों पर भी दबाव
अमेरिका अब उन देशों और बैंकों पर भी शिकंजा कस रहा है, जो ईरान के साथ वित्तीय लेनदेन में शामिल बताए जा रहे हैं। चीन, हांगकांग, यूएई और ओमान को पत्र भेजकर ऐसे बैंकों की पहचान की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने फ्रंट कंपनियों के जरिए करीब 9 अरब डॉलर की रकम अमेरिकी बैंकिंग चैनल्स से प्रोसेस की।
हॉर्मुज स्ट्रेट पर भी नजर
वॉशिंगटन ने संकेत दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी सख्ती बढ़ सकती है। इससे चीन समेत अन्य देशों के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। बेसेंट के मुताबिक चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और उसकी कुल सालाना खरीद का करीब 8% हिस्सा ईरान से आता है।

