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क्या गलत हैं भारत की जीडीपी के आंकड़े? पूर्व IMF अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने दिया जवाब

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए गोपीनाथ ने स्पष्ट किया कि आईएमएफ में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें भारत के जीडीपी आंकड़ों में गड़बड़ी का कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

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Gita Gopinath

Davos 2026: दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भारत के आर्थिक आंकड़ों को लेकर चल रही बहस पर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई से बात करते हुए गोपीनाथ ने स्पष्ट किया कि आईएमएफ में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें भारत के जीडीपी आंकड़ों में गड़बड़ी का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। फिलहाल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में काम कर रहीं गोपीनाथ ने बताया कि भारत के आंकड़ों की तुलना अन्य उभरते देशों से करना जरूरी है।

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क्यों मिला भारत को 'C' ग्रेड?

हाल ही में आईएमएफ की एक रिपोर्ट में भारत के जीडीपी डेटा को 'C' ग्रेड दिया गया था, जिससे डेटा की शुद्धता पर सवाल उठे थे। इस पर सफाई देते हुए गीता गोपीनाथ ने कहा कि यह ग्रेडिंग किसी देश की तुलना में नहीं, बल्कि एक तय मानक पर दी जाती है।

उन्होंने बताया कि ज्यादातर उभरते और विकासशील देशों को यह ग्रेड मिलता है क्योंकि उनके पास नेशनल अकाउंट्स के लिए उच्च स्तरीय आंकड़े नहीं होते। गोपीनाथ के मुताबिक, इन देशों के पास बेहतर 'प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स' और 'डबल डिफ्लेशन' जैसी तकनीकों की कमी होती है, जिसके लिए बड़े निवेश की जरूरत है।

डेटा में नहीं मिली कोई बड़ी खामी

गोपीनाथ ने कहा कि आईएमएफ केवल मुख्य जीडीपी आंकड़ों पर भरोसा नहीं करता, बल्कि वह कई 'हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स' यानी तेजी से बदलने वाले संकेतकों की भी जांच करता है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा कोई 'स्मोकिंग गन' यानी पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे लगे कि भारत के आंकड़े दूसरे देशों के मुकाबले खराब या गलत हैं।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आईएमएफ और भारतीय सांख्यिकी कार्यालय मिलकर डेटा संग्रह की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में चल रही 'रीबेसिंग' प्रक्रिया से आने वाले समय में आंकड़ों की गुणवत्ता में काफी सुधार होने की उम्मीद है।