ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन का मेगा डैम बढ़ा सकता है बाढ़ का खतरा! चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च में बड़ा खुलासा
चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है। इसी बीच चीनी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने बाढ़ और पानी के बढ़ते बहाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आखिर भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है यह मेगा डैम? जानिए पूरी रिपोर्ट।

In Short
- चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च में ब्रह्मपुत्र नदी में पानी का बहाव और बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।
- चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर 168 अरब डॉलर की लागत से दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है।
- वैज्ञानिकों ने डैम के नीचे एक्टिव फॉल्ट लाइन होने और भूकंप व भूस्खलन से सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है। इसी बीच चीनी वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने नदी में पानी के बढ़ते बहाव और बाढ़ के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारत समेत दक्षिण एशिया के दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि रिसर्च में क्या सामने आया है और चीन के इस मेगा डैम को लेकर वैज्ञानिक क्यों चिंता जता रहे हैं।
695 साल पुराने डेटा से वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया?
Business Today की रिपोर्ट के मुताबिक, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज और युन्नान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के बहाव का अध्ययन किया है। इसके लिए उन्होंने दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में पेड़ों के छल्लों की चौड़ाई (Tree-Ring Width) से मिले डेटा की मदद ली।
वैज्ञानिकों ने साल 1325 से 2020 तक नदी के बहाव का रिकॉर्ड तैयार किया। इसके बाद क्लाइमेट डेटा की मदद से एक मॉडल बनाया। रिसर्च में सामने आया कि इस सदी के दौरान नदी में पानी का बहाव बढ़ सकता है। साथ ही बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ने की आशंका है।
यह रिसर्च 8 अक्टूबर को China Science Bulletin जर्नल में प्रकाशित हुई थी। इसकी जानकारी सोमवार को South China Morning Post ने दी।
भारत समेत दक्षिण एशिया के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) कहा जाता है। यही नदी भारत में ब्रह्मपुत्र के नाम से बहती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, तिब्बती पठार का तापमान दुनिया के औसत मुकाबले करीब दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। इससे बर्फ और नदी के पानी के बहाव पर असर पड़ रहा है।
रिसर्च में कहा गया है कि भविष्य में डैम, पानी के स्टोरेज और दूसरे प्रोजेक्ट की प्लानिंग करते समय इन बदलावों को ध्यान में रखना जरूरी है। इससे दक्षिण एशिया में सूखे और बाढ़ के खतरों का आकलन करने में मदद मिलेगी।
168 अरब डॉलर का मेगा डैम और भूकंप का खतरा
चीन दक्षिण-पूर्वी तिब्बत के मेडोग (Motuo) इलाके में करीब 168 अरब डॉलर की लागत से मेगा डैम बना रहा है। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 60,000 मेगावाट से ज्यादा होने की उम्मीद है। यह चीन के थ्री गॉर्जेस डैम की क्षमता से करीब तीन गुना है।
जुलाई में चीनी भूवैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि डैम के नीचे एक एक्टिव फॉल्ट लाइन मौजूद है। इससे डैम की मजबूती प्रभावित हो सकती है। वैज्ञानिकों ने भूस्खलन और पहाड़ों के खिसकने से बचाव के उपाय मजबूत करने की सलाह दी थी।
चीन ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
हिमालयी इलाके में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा पहले भी सामने आ चुका है। 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने से नदी का अस्थायी अवरोध टूट गया था। इससे आई अचानक बाढ़ में करीब 1,500 लोगों की मौत हुई और 5,500 से ज्यादा लोग लापता हो गए।
हालांकि, चीन ने अपने मेगा डैम का बचाव किया है। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से नदी के निचले इलाकों वाले देशों पर असर नहीं पड़ेगा। चीन के मुताबिक, कई दशकों की स्टडी और सुरक्षा उपायों के जरिए इससे जुड़े खतरों का ध्यान रखा गया है।

