BRICS Summit 2026: दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है यह समूह, जानिए कितना बड़ा है BRICS
BRICS अब दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक समूहों में शामिल हो चुका है। 11 सदस्य देशों वाला यह संगठन करीब 3.9 अरब लोगों यानी दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। बढ़ते व्यापार, मजबूत बाजार और वैश्विक GDP में बड़ी हिस्सेदारी के कारण BRICS की भूमिका अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और कूटनीति में लगातार बढ़ रही है।

In Short
- BRICS के 11 सदस्य देश दुनिया की करीब 49.5% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं
- समूह की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी करीब 41% और व्यापार में करीब 26% है
- BRICS देशों के बीच व्यापार 2003 के 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर हुआ
BRICS Summit 2026 की मेजबानी भारत कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में दुनिया के सबसे बड़े उभरते आर्थिक समूहों में से एक पर सबकी नजर है। BRICS अब केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि अपनी बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और व्यापारिक ताकत के कारण वैश्विक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है।
वर्तमान में BRICS में 11 सदस्य देश शामिल हैं- भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, UAE और इंडोनेशिया। यह समूह अब दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
दुनिया की करीब 49.5% आबादी BRICS में
2026 के आंकड़ों के अनुसार BRICS देशों की कुल आबादी करीब 3.9 अरब है, जो दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49.5% हिस्सा है। इस विशाल जनसंख्या का बड़ा हिस्सा भारत और चीन में केंद्रित है, जो BRICS के सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं।
इसके अलावा इंडोनेशिया, ब्राजील, रूस, मिस्र, इथियोपिया और ईरान जैसे देश भी बड़े घरेलू बाजार उपलब्ध कराते हैं। इससे BRICS को एशिया, अफ्रीका, यूरोप और मध्य पूर्व तक मजबूत पहुंच मिलती है।
हालांकि, सभी सदस्य देशों की जनसांख्यिकी एक जैसी नहीं है। भारत की आबादी में वृद्धि जारी है, जबकि चीन में जन्म दर कम होने से जनसंख्या वृद्धि धीमी हुई है। रूस जनसंख्या गिरावट की चुनौती का सामना कर रहा है।
करीब 4 अरब लोगों का बड़ा बाजार
BRICS देशों की लगभग 4 अरब की आबादी कंपनियों के लिए बड़ा उपभोक्ता और श्रम बाजार तैयार करती है। हालांकि, केवल बड़ी आबादी का मतलब ज्यादा खरीद क्षमता नहीं होता।
UAE और सऊदी अरब जैसे देशों में प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है और उनके पास बड़ी पूंजी उपलब्ध है। वहीं भारत, मिस्र और इथियोपिया जैसे देशों में बड़ा बाजार और लंबी अवधि में विकास की संभावनाएं हैं।
भारत और चीन में बढ़ता मध्यम वर्ग BRICS की आर्थिक ताकत को और बढ़ाता है। दोनों देश वैश्विक कंपनियों के लिए बड़े उपभोक्ता बाजार बन चुके हैं।
वैश्विक व्यापार में 26% हिस्सेदारी
BRICS की ताकत केवल आबादी तक सीमित नहीं है। यह समूह वैश्विक व्यापार में भी बड़ी भूमिका रखता है। 11 सदस्य देशों का समूह दुनिया के करीब 26% व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, BRICS देशों के बीच आपसी व्यापार 2003 में 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 1.17 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान सदस्य देश व्यापार, डिजिटल इकोनॉमी, निवेश, टेक्नोलॉजी और वित्तीय सहयोग को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
BRICS बनाम G7
BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत की तुलना अक्सर G7 देशों से की जाती है। जब 2006 में BRICS की शुरुआत हुई थी, तब इसका वैश्विक GDP में हिस्सा 20.4% था, जो G7 से काफी कम था।
लेकिन समय के साथ स्थिति बदली। IMF के आंकड़ों के अनुसार BRICS ने 2020 में वैश्विक GDP हिस्सेदारी के मामले में G7 को पीछे छोड़ दिया।
2026 में BRICS की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी करीब 41% रहने का अनुमान है, जबकि G7 की हिस्सेदारी करीब 28% है।
हालांकि, BRICS की आर्थिक ताकत काफी हद तक चीन और भारत पर निर्भर है। चीन समूह की GDP में करीब 48.5% और भारत करीब 20.7% योगदान देते हैं।
BRICS का सबसे बड़ा फायदा इसकी विविधता और विशाल बाजार है, लेकिन चुनौती यह है कि अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं और राजनीतिक हितों वाले देशों के बीच गहरा आर्थिक सहयोग कैसे बनाया जाए।

