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203 करोड़ के कर्ज पर ₹14 हजार करोड़ वसूली का दावा, माल्या ने पूछे बड़े सवाल

विजय माल्या ने एक बार फिर भारत की कर्ज वसूली व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। सुभाष चंद्रा के कर्ज निपटारे की खबरों के बाद माल्या ने अपनी वसूली और न्याय से जुड़े मुद्दे उठाए। उनके नए बयान ने पुराने कर्ज विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।

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In Short

  • विजय माल्या ने भारत की कर्ज वसूली व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बैंकों ने उनसे कर्ज से ज्यादा रकम वसूल की है।
  • सुभाष चंद्रा के कर्ज निपटारे की खबरों के बाद माल्या ने पूछा कि अलग-अलग कर्जदारों के मामलों में अलग नियम क्यों लागू होते हैं।
  • सरकार के अनुसार भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामलों में अब तक ₹19,187 करोड़ की वसूली हुई है, लेकिन माल्या जैसे बड़े नाम अभी भी सूची में हैं।
AI Generated Image

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने भारत की कर्ज वसूली व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। माल्या ने दावा किया है कि सरकारी बैंकों ने उनसे कर्ज से ज्यादा रकम वसूल कर ली है, फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला है।

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 Subhash Chandra के मामले पर उठाए सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स में Essel Group के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के ₹22,006.57 करोड़ के कर्ज दावों को IBC के तहत सिर्फ ₹6.5 करोड़ में निपटाने की खबरों के बाद माल्या ने अपनी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर यह सही है तो सुभाष चंद्रा को बधाई। माल्या ने कहा कि सरकार और बैंकों ने उनसे ₹6,203 करोड़ के फैसले वाले कर्ज के मुकाबले ₹14,100 करोड़ की वसूली की बात मानी है। उन्होंने सवाल किया कि कई अन्य कर्जदारों को कम रकम में समझौता करने का मौका मिला, लेकिन उनके मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ।

 वसूली के आंकड़ों पर पहले भी उठा चुके हैं सवाल

विजय माल्या इससे पहले भी अपनी संपत्तियों से हुई वसूली को लेकर सवाल उठा चुके हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से ₹14,131.60 करोड़ की वसूली की जानकारी देने के बाद माल्या ने कहा था कि यह रकम अदालत द्वारा तय कर्ज से दोगुने से ज्यादा है।उन्होंने सरकारी आंकड़ों में अंतर का मुद्दा भी उठाया था। माल्या ने पूछा था कि सरकार, बैंक और अधिकारियों की ओर से बताए गए कर्ज और वसूली के आंकड़ों में अंतर क्यों है।

 जांच की मांग कर चुके हैं माल्या

माल्या ने अपने पुराने बयानों में कहा था कि वसूली गई रकम का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने एक रिटायर्ड जज से जांच कराने की मांग करते हुए कहा था कि उनके ₹6,203 करोड़ के फैसले वाले कर्ज के मुकाबले इतनी बड़ी रकम कैसे दिखाई जा रही है।

 सरकार का रुख सख्त

केंद्र सरकार का कहना है कि बड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें से नौ लोग सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में जुड़े थे। इन मामलों में मूल नुकसान ₹26,645 करोड़ और ब्याज सहित कुल नुकसान ₹31,437 करोड़ बताया गया। इन मामलों में अब तक ₹19,187 करोड़ की वसूली हुई है।