
ट्रेन की लोकेशन बताने वाला ऐप कैसे बना करोड़ों की डील, जानें Google ने क्यों खरीदा
ट्रेन की लोकेशन पता करने की एक छोटी परेशानी ने एक बड़े टेक आइडिया को जन्म दिया। Where is My Train ऐप ने बिना इंटरनेट और GPS के भी यात्रियों को ट्रेन की जानकारी देने का काम किया। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि 2018 में Google ने इसे बनाने वाली कंपनी को खरीद लिया।

In Short
- ट्रेन की लोकेशन पता करने की परेशानी से शुरू हुआ Where is My Train ऐप 2015 में लॉन्च हुआ।
- ऐप की लोकप्रियता बढ़ी तो 2018 में Google ने इसे बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs को खरीद लिया।
कई बार रोजमर्रा की छोटी परेशानी ही किसी बड़े आइडिया की शुरुआत बन जाती है। Where is My Train ऐप की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ट्रेन के लेट होने और उसकी सही लोकेशन पता नहीं चलने की समस्या को हल करने के लिए बनाया गया यह ऐप आज लाखों यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
इस ऐप को बनाने का आइडिया अहमद निजाम और उनकी टीम को ट्रेन यात्रियों की इसी परेशानी से आया। रेलवे स्टेशन पर अक्सर लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पाती थी कि उनकी ट्रेन कहां पहुंची है और स्टेशन तक आने में कितना समय लगेगा।
2015 में लॉन्च हुआ Where is My Train ऐप
यात्रियों की इसी समस्या को दूर करने के लिए टीम ने Where is My Train ऐप तैयार किया। इसे साल 2015 में लॉन्च किया गया था।
ऐप का उद्देश्य काफी आसान था। यात्रियों को उनकी ट्रेन की सही लोकेशन और सफर से जुड़ी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके।
धीरे-धीरे यह ऐप यात्रियों के बीच लोकप्रिय होने लगा क्योंकि इसमें ट्रेन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध थीं।
बिना इंटरनेट और GPS के भी करता था काम
इस ऐप की सबसे खास बात इसका ऑफलाइन ट्रेन ट्रैकिंग फीचर था। कई मामलों में यूजर बिना इंटरनेट और GPS के भी ट्रेन की लोकेशन पता कर सकते थे।
इसके लिए ऐप मोबाइल टावर से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करता था। भारत के कई ऐसे इलाकों में जहां इंटरनेट कनेक्शन कमजोर रहता है, वहां यह फीचर यात्रियों के लिए काफी मददगार साबित हुआ।

ऐप में लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन टाइमटेबल, PNR स्टेटस, प्लेटफॉर्म की जानकारी और कोच की स्थिति जैसी सुविधाएं भी दी गई थीं।
Google की नजर में आया ऐप
Where is My Train ऐप की बढ़ती लोकप्रियता ने Google का ध्यान अपनी ओर खींचा। साल 2018 में Google ने इस ऐप को बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs को खरीद लिया।
इस डील की आधिकारिक कीमत Google की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई थी। हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी कीमत करीब 280 करोड़ रुपये बताई गई थी।
एक आम समस्या से बनी बड़ी सफलता की कहानी
Where is My Train की कहानी दिखाती है कि किसी बड़ी कंपनी या बड़े निवेश के बिना भी एक उपयोगी आइडिया लोगों की जिंदगी आसान बना सकता है।
ट्रेन लेट होने जैसी रोजमर्रा की परेशानी को समझकर बनाया गया यह ऐप आगे चलकर करोड़ों रुपये की डील तक पहुंच गया। यही वजह है कि यह ऐप ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के बीच काफी उपयोगी और लोकप्रिय बना।

